क्या बुजुर्गों के लिए वरदान हैं ये योगासन, जोड़ों के दर्द और तनाव को दूर करेंगे?
सारांश
Key Takeaways
- वीरभद्रासन से शरीर की शक्ति में वृद्धि होती है।
- बालासन से तनाव और पाचन में सुधार होता है।
- ताड़ासन से रक्त संचार बेहतर होता है।
- कटि चक्रासन से एकाग्रता बढ़ती है।
- भ्रामरी से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है।
नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। समय का चक्र हमेशा चलता रहता है और उम्र के बढ़ने के साथ हमारे शरीर में कई बदलाव आते हैं। यह सामान्य धारणा है कि बढ़ती उम्र का मतलब शारीरिक कमजोरी और बीमारियों का घर होना है, लेकिन योग के माध्यम से इस सोच को बदला जा सकता है।
कुछ विशेष आसनों का रोजाना अभ्यास करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं, जोड़ों में दर्द कम होता है, पाचन में सुधार होता है और तनाव से राहत मिलती है। हम यहाँ कुछ ऐसे योगासन साझा करेंगे जो बुजुर्ग आसानी से कर सकते हैं।
वीरभद्रासन: इसे अंग्रेजी में वॉरियर पोज भी कहा जाता है। इसे करने से शरीर की शक्ति बढ़ती है, संतुलन बेहतर होता है और मन की शांति बनी रहती है।
बालासन: इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और शरीर में लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) बढ़ता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया में सुधार होता है, जिससे अपच, वात और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
ताड़ासन: यह आसन बढ़ती उम्र के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इसके नियमित अभ्यास से रक्त संचार बेहतर होता है और शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में कई लाभ होते हैं। यह शरीर की मुद्रा को सुधारता है, जिससे रक्तचाप स्थिर रहता है।
कटि चक्रासन: यह तनाव को कम करने के साथ-साथ एकाग्रता और याददाश्त को भी बढ़ाता है। इसके नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत करता है।
भ्रामरी: यह प्राणायाम सभी आयु के लोग कर सकते हैं। अक्सर बुजुर्गों को नींद में समस्या होती है। इसके नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है और याददाश्त भी बेहतर होती है।
इन आसनों का नियमित अभ्यास स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, लेकिन कोई नया व्यायाम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है, खासकर यदि कोई पुरानी स्वास्थ्य समस्या हो।