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कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने मालदा घटना की कड़ी निंदा की, वकील को किया निलंबित

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कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने मालदा घटना की कड़ी निंदा की, वकील को किया निलंबित

सारांश

कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों पर हमले की निंदा की। उन्होंने अपने सदस्य वकील मोफक्केरुल इस्लाम को निलंबित किया और घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की जांच एनआईए को सौंप दी है।

मुख्य बातें

कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने निंदा की।
वकील मोफक्केरुल इस्लाम को निलंबित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को जांच सौंपी।
पुलिस की निष्क्रियता पर चिंता जताई गई।
अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

कोलकाता/नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा करते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने मंगलवार को प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में एक सदस्य को निलंबित किया गया और घटना में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

बार एसोसिएशन की सभा में इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। यह हमला 1 अप्रैल की सुबह कालियाचक, मालदा में हुआ था, जब सात न्यायिक अधिकारी लगभग नौ घंटे तक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास के दौरान बंधक बनाए गए।

प्रस्ताव में कहा गया, "हम कोलकाता हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य, न्यायपालिका और उसके अंगों पर हुए इस भयावह और नीच हमले से अत्यंत चिंतित हैं।"

बार एसोसिएशन ने इस घटना को एक गंभीर और घृणित आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि ऐसे हमलों के सामने चुप नहीं रहना चाहिए और इसे राज्य भर में डर फैलाने का जानबूझकर प्रयास करार दिया। प्रस्ताव में पुलिस की कथित निष्क्रियता के बारे में भी चिंता जताई गई।

इस दौरान कहा गया कि पुलिस प्रशासन ने दर्शक बनकर लगभग नौ घंटे तक इस बर्बरता और अनियंत्रित हिंसा को जारी रहने दिया।

प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि वकील मोफक्केरुल इस्लाम को इस घटना का मुख्य अपराधी और भीड़ को उकसाने वाला नामजद किया गया है। वह बार एसोसिएशन के सदस्य थे। बार एसोसिएशन ने इस कृत्य की निंदा करते हुए इस्लाम को तात्कालिक प्रभाव से सदस्यता से निलंबित करने का निर्णय लिया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि स्थिति के अनुसार हम सर्वसम्मति से वकील मोफक्केरुल इस्लाम को कोलकाता हाई कोर्ट के इस सम्मानित बार एसोसिएशन की सदस्यता से निलंबित करते हैं, जब तक आपराधिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

इसके अलावा, उनके निष्कासन के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने और बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल से उन्हें डि-एनरोल करने का अनुरोध किया जाएगा।

प्रस्ताव में कहा गया, "हम बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल से अनुरोध करेंगे कि इस अपराधी वकील को उसके आपराधिक कृत्यों के लिए डि-एनरोल किया जाए, जो एक शिक्षित वकील की नैतिकता के खिलाफ है।"

इस बीच, इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मालदा मामले की जांच सौंपने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश भारत सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस के खिलाफ आरोप स्वतंत्र जांच के योग्य हैं और एनआईए को घटना से जुड़े सभी 12 एफआईआर की जांच करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को यह भी अनुमति दी कि यदि व्यापक साजिश का पता चलता है तो अतिरिक्त एफआईआर दर्ज की जाए, अदालत के समक्ष नियमित स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, और राज्य पुलिस को सभी सबूत सौंपने और पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सदस्या को निलंबित भी किया है। यह स्पष्ट करता है कि कानून की रक्षा में कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं है, और ऐसे कृत्यों की सख्त निंदा की जानी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने क्या कदम उठाए हैं?
बार एसोसिएशन ने घटना की निंदा की और शामिल वकील मोफक्केरुल इस्लाम को निलंबित किया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्णय लिया?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है।
क्या पुलिस ने इस घटना में कोई कार्रवाई की?
प्रस्ताव में पुलिस की निष्क्रियता पर चिंता जताई गई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी और वकील को डि-एनरोल करने का अनुरोध किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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