सीबीएसई 12वीं बोर्ड परिणाम 2026: पास प्रतिशत 85.20, पिछले साल से 3.19% कम; पहली बार पूर्ण डिजिटल मूल्यांकन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 13 मई 2026 को कक्षा 12वीं का बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किया, जिसमें देशभर का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया। यह आँकड़ा वर्ष 2025 के 88.39% की तुलना में 3.19 प्रतिशत कम है। इस वर्ष बोर्ड ने पहली बार पूर्ण स्तर पर 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली लागू कर मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया।
मुख्य परिणाम आँकड़े
वर्ष 2026 में कक्षा 12वीं के लिए कुल 17 लाख 80 हजार 365 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 17 लाख 68 हजार 968 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 15,07,109 विद्यार्थी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। परीक्षाएँ 17 फरवरी 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गईं, जिसके लिए देशभर में 19,967 स्कूलों और 7,573 परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था की गई — जो वर्ष 2025 के 19,299 स्कूलों और 7,330 केंद्रों से अधिक है।
लड़कियों का बेहतर प्रदर्शन, ट्रांसजेंडर विद्यार्थी शत-प्रतिशत
लैंगिक प्रदर्शन के मोर्चे पर लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों को पीछे छोड़ा। लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 88.86% रहा, जबकि लड़कों का 82.13% दर्ज हुआ — यानी लड़कियाँ लड़कों से 6.73 प्रतिशत आगे रहीं। ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों ने इस वर्ष भी शत-प्रतिशत उत्तीर्णता दर्ज की, जो लगातार सराहनीय उपलब्धि है।
दिल्ली क्षेत्र का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर
दिल्ली क्षेत्र ने राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए मजबूत प्रदर्शन किया। दिल्ली पश्चिम रीजन का परिणाम 92.34% और दिल्ली पूर्व क्षेत्र का 91.73% रहा। दोनों को मिलाकर समग्र दिल्ली क्षेत्र का उत्तीर्ण प्रतिशत 91.97% दर्ज हुआ। दिल्ली क्षेत्र में कुल 3 लाख 1 हजार 977 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 3 लाख 732 परीक्षा में शामिल हुए और 2 लाख 76 हजार 583 सफल रहे।
पहली बार पूर्ण 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' प्रणाली
सीबीएसई ने बताया कि इस वर्ष 98,66,622 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया गया, जिसे बोर्ड ने अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल मूल्यांकन अभियान बताया है। इस प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में परीक्षकों तक पहुँचाया गया, जिससे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से भेजने की आवश्यकता समाप्त हो गई। अब देश और विदेश में संबद्ध स्कूलों के शिक्षक अपने स्थान से ही मूल्यांकन कर सकते हैं।
डिजिटल मूल्यांकन के फायदे और आगे की राह
बोर्ड के अनुसार नई व्यवस्था से अंक जोड़ने, दर्ज करने और अपलोड करने में होने वाली मानवीय गलतियाँ समाप्त हुई हैं। प्रत्येक उत्तर का मूल्यांकन निर्धारित अंक योजना के अनुसार सुनिश्चित किया गया, जिससे विद्यार्थियों के साथ एकसमान व्यवहार हो रहा है। बोर्ड का कहना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की भावना के अनुरूप पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करती है। आने वाले वर्षों में यह प्रणाली और अधिक परिष्कृत किए जाने की संभावना है।