चार धाम यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य शिविर: 1000 से अधिक तीर्थयात्रियों की जांच
सारांश
Key Takeaways
- चार धाम यात्रा 2025 मार्ग पर विशेष ट्रांजिट स्वास्थ्य शिविर और OPD स्थापित किए गए हैं।
- OSD प्रजापति नौटियाल ने बताया कि यात्रा मार्ग पर पांच चिकित्सा टीमें तैनात हैं।
- अब तक 1,000 से अधिक तीर्थयात्री इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं।
- 50 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं की रक्तचाप और शुगर लेवल की जांच की जा रही है।
- चार धाम यात्रा 19 अप्रैल को यमुनोत्री-गंगोत्री से शुरू हुई; केदारनाथ 22 और बद्रीनाथ 23 अप्रैल को खुले।
- यात्रा मार्ग पर विश्राम शिविर भी स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालु थकान दूर कर सकें।
ऋषिकेश, 26 अप्रैल। चार धाम यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है — यात्रा पथ पर विशेष ट्रांजिट स्वास्थ्य शिविर और आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक 1,000 से अधिक तीर्थयात्री स्वास्थ्य जांच करा चुके हैं। यह जानकारी चार धाम यात्रा प्रशासन संगठन के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) प्रजापति नौटियाल ने रविवार, 26 अप्रैल को दी।
चार धाम यात्रा 2025 की शुरुआत और स्वास्थ्य तैयारियां
इस वर्ष चार धाम यात्रा 2025 की शुरुआत 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों के कपाट खुलने के साथ हुई। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए।
यात्रा के पहले सप्ताह में ही लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों की ओर उमड़ पड़े हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक चिकित्सा प्रबंध किए हैं।
ट्रांजिट कैंप और OPD की सुविधाएं
OSD प्रजापति नौटियाल ने बताया कि यात्रा मार्ग पर स्थापित ट्रांजिट स्वास्थ्य शिविरों में पांच विशेष चिकित्सा टीमें तैनात हैं। इन शिविरों में 50 वर्ष से अधिक आयु के तीर्थयात्रियों की रक्तचाप (Blood Pressure), रक्त शर्करा (Sugar Level) सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
इसके साथ ही OPD सुविधा के माध्यम से तीर्थयात्रियों को आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 1,000 से अधिक श्रद्धालु इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं।
तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य सलाह
नौटियाल ने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे यात्रा शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी स्वास्थ्य सलाह (Health Advisory) को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसके अनुसार यात्रा की योजना बनाएं।
उन्होंने विशेष रूप से चेतावनी दी कि यदि किसी श्रद्धालु को यात्रा के दौरान चक्कर आना, सीने में दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो वे तत्काल नजदीकी OPD या स्वास्थ्य शिविर में जाकर चिकित्सकों से परामर्श लें।
विश्राम शिविरों की भी व्यवस्था
चिकित्सा सुविधाओं के अलावा, प्रशासन ने यात्रा मार्ग के विभिन्न स्थानों पर विश्राम शिविर भी स्थापित किए हैं। नौटियाल ने बताया कि ये शिविर उन स्थानों पर लगाए गए हैं जहां तीर्थयात्री रुककर थकान दूर कर सकें और आगे की यात्रा के लिए खुद को तैयार कर सकें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए ये सभी तैयारियां पहले से ही सुनिश्चित की गई हैं।
पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रबंधन
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की मृत्यु की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें अधिकांश मामले हृदयाघात (Heart Attack) और ऊंचाई जनित बीमारी (Altitude Sickness) के थे। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए इस वर्ष प्रशासन ने यात्रा शुरू होने से पहले ही व्यापक चिकित्सा तंत्र तैयार कर लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि 3,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे धामों पर ऑक्सीजन की कमी के कारण बुजुर्ग और पहले से बीमार श्रद्धालुओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इस वर्ष की तैयारियां इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं।
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ेगी, प्रशासन इन स्वास्थ्य सुविधाओं को और विस्तार देने की योजना बना रहा है। चार धाम यात्रा 2025 के समापन तक ये सेवाएं निरंतर जारी रहेंगी।