श्रम सशक्तिकरण से बनेगा 'विकसित भारत': हरियाणा CM सैनी का ऐतिहासिक ऐलान, न्यूनतम वेतन ₹19,425

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श्रम सशक्तिकरण से बनेगा 'विकसित भारत': हरियाणा CM सैनी का ऐतिहासिक ऐलान, न्यूनतम वेतन ₹19,425

सारांश

हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में श्रम जागरूकता कार्यक्रम में राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की घोषणा की। न्यूनतम वेतन 35%25 बढ़ाकर ₹19,425 किया गया। 15 जून तक सभी पात्र कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देने का वादा। हरियाणा देश का पहला राज्य बना।

Key Takeaways

  • हरियाणा देश का पहला राज्य बना जिसने वेतन संहिता के तहत न्यूनतम मूल वेतन में 35%25 की वृद्धि लागू की।
  • न्यूनतम वेतन 2005 में ₹2,903 से बढ़कर 2025 में ₹19,425 हो गया — 11 वर्षों में तीन गुना से अधिक।
  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की घोषणा की, जो ऑटो चालकों और ड्राइवरों को भी कवर करेगा।
  • सभी पात्र कर्मचारियों को 15 जून 2025 तक नियुक्ति पत्र देने का आश्वासन दिया गया।
  • हरियाणा में ई-श्रम पोर्टल पर 54.32 लाख असंगठित और 33.58 लाख संगठित क्षेत्र के श्रमिक पंजीकृत हैं।
  • यह कार्यक्रम गुरुग्राम के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में भारतीय मजदूर संघ के साथ आयोजित हुआ।

चंडीगढ़, 26 अप्रैल: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को गुरुग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रम जागरूकता कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने का एकमात्र मार्ग श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी और श्रम सशक्तिकरण है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य में एक नया राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गठित किया जाएगा। हरियाणा देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने वेतन संहिता के अंतर्गत न्यूनतम मूल वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू की है।

राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन

भारतीय मजदूर संघ ने ऑटो चालकों और अन्य ड्राइवरों के लिए एक समर्पित कल्याण व्यवस्था की मांग रखी थी। इस पर मुख्यमंत्री सैनी ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की घोषणा की।

यह बोर्ड संगठित श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के साथ-साथ ऑटो चालकों और अन्य ड्राइवरों को भी सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करेगा। यह कदम असंगठित क्षेत्र के उन लाखों श्रमिकों के लिए राहत की खबर है जो अब तक सरकारी सुरक्षा छतरी से बाहर थे।

न्यूनतम वेतन में ऐतिहासिक वृद्धि

मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि हरियाणा ने वेतन संहिता के प्रावधानों के तहत न्यूनतम मूल वेतन में 35 प्रतिशत की वृद्धि लागू कर देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह वृद्धि श्रमिक कल्याण की दिशा में राज्य का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।

वेतन वृद्धि की ऐतिहासिक यात्रा इस प्रकार रही — 2005 में न्यूनतम वेतन ₹2,903 था, 2014 तक यह ₹6,289 पहुंचा, और अब वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह ₹19,425 हो गया है। यानी पिछले 11 वर्षों में न्यूनतम वेतन तीन गुना से भी अधिक बढ़ा है।

नियुक्ति पत्र और सेवा सुरक्षा

पहले से घोषित सेवा सुरक्षा ढांचे का उल्लेख करते हुए सीएम सैनी ने आश्वासन दिया कि सभी पात्र कर्मचारियों को 15 जून तक नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इससे रोजगार सुरक्षा और संस्थागत पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।

यह घोषणा उन लाखों अनौपचारिक कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से नियुक्ति पत्र के अभाव में अनिश्चितता में काम कर रहे थे। 15 जून 2025 की समयसीमा सरकार की जवाबदेही की कसौटी बनेगी।

ई-श्रम पोर्टल और पंजीकरण

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए 'ई-श्रम' पोर्टल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीकरण पर जोर दिया जा रहा है। हरियाणा में अब तक 54.32 लाख से अधिक श्रमिक इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।

इसके अलावा संगठित क्षेत्र में 4.5 लाख प्रतिष्ठानों में 33.58 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि हरियाणा श्रम पंजीकरण में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्यों में है।

व्यापक संदर्भ और विश्लेषण

यह घोषणाएं ऐसे समय में आई हैं जब देश में 2025 के श्रम दिवस से पहले श्रमिक अधिकारों पर राष्ट्रव्यापी बहस छिड़ी हुई है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं।

हरियाणा का 35%25 न्यूनतम वेतन वृद्धि का कदम अन्य राज्यों के लिए एक मानदंड स्थापित करता है। तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो अधिकांश राज्यों में न्यूनतम वेतन वृद्धि 10-15%25 के दायरे में ही रही है। इस पृष्ठभूमि में हरियाणा का यह निर्णय श्रमिक राजनीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के संदर्भ में।

आगे देखें तो राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन और 15 जून तक नियुक्ति पत्र वितरण — ये दोनों वादे सरकार की विश्वसनीयता की असली परीक्षा होंगे। श्रमिक संगठनों की नजर इन घोषणाओं के क्रियान्वयन पर टिकी रहेगी।

Point of View

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन और 15 जून की नियुक्ति पत्र समयसीमा दोनों वादे अभी कागज पर हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि न्यूनतम वेतन में 35%25 वृद्धि का लाभ तभी मिलेगा जब नियोक्ता इसे वास्तव में लागू करें — हरियाणा में श्रम कानूनों के उल्लंघन की शिकायतें नई नहीं हैं। विकसित भारत के नारे और जमीनी श्रमिक वास्तविकता के बीच की खाई को पाटने के लिए घोषणाओं से आगे ठोस निगरानी तंत्र की जरूरत है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

हरियाणा में न्यूनतम वेतन अब कितना है?
हरियाणा में वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन ₹19,425 प्रति माह है। राज्य सरकार ने वेतन संहिता के तहत इसमें 35 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की है, जो देश में पहली बार हुई है।
हरियाणा राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड क्या है?
यह एक नया बोर्ड है जिसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गठित करने की घोषणा की है। यह बोर्ड ऑटो चालकों, ड्राइवरों और अन्य संगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करेगा।
हरियाणा में ई-श्रम पोर्टल पर कितने श्रमिक पंजीकृत हैं?
हरियाणा में 54.32 लाख से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं। संगठित क्षेत्र में 4.5 लाख प्रतिष्ठानों में 33.58 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं।
हरियाणा में नियुक्ति पत्र कब तक मिलेंगे?
मुख्यमंत्री सैनी ने घोषणा की है कि सभी पात्र कर्मचारियों को 15 जून 2025 तक नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इससे रोजगार सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
विकसित भारत 2047 में श्रम सशक्तिकरण की क्या भूमिका है?
हरियाणा CM नायब सिंह सैनी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी और श्रम सशक्तिकरण के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय और राज्य अर्थव्यवस्था की नींव श्रमिकों की मेहनत पर टिकी है।
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