क्या छत्तीसगढ़ के सुकमा में 26 माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं?

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क्या छत्तीसगढ़ के सुकमा में 26 माओवादी आत्मसमर्पण कर रहे हैं?

सारांश

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक ऐतिहासिक घटना घटित हुई है, जहां 26 माओवादी, जिनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण किया। यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की नीति और पुलिस के प्रभावी अभियानों का परिणाम है, जो माओवादी संगठन के अस्तित्व को कमजोर कर रहा है।

Key Takeaways

  • 26 माओवादी, जिनमें 7 महिलाएं शामिल हैं, ने आत्मसमर्पण किया।
  • आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का परिणाम है।
  • माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है और मुख्यधारा में लौटने का मार्ग खुल रहा है।
  • सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई से माओवादी गतिविधियों में कमी आई है।
  • सुकमा पुलिस नक्सल मुक्त बस्तर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुकमा, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। बुधवार को, सात महिलाओं समेत कुल 26 माओवादी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

ये माओवादी पीएलजीए बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय थे। इन पर कुल 64 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था। आत्मसमर्पण की प्रक्रिया सुकमा पुलिस के रक्षित आरक्षी केंद्र में संपन्न हुई, जहां पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की 'नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति- 2025' और सुकमा पुलिस के 'पूना मार्गेम अभियान' के प्रभाव के कारण हुआ। इस अभियान का उद्देश्य 'पुनर्वास से पुनर्जीवन' है। पुलिस के निरंतर ऑपरेशन और आंतरिक क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित होने से माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है। इससे बाकी माओवादी के लिए हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का मार्ग खुल रहा है।

आत्मसमर्पित माओवादी विभिन्न रैंक के हैं, जिसमें एक सीवाईपीसीएम, एक डीवीसीएम, तीन पीपीसीएम, तीन एसीएम और 18 पार्टी सदस्य शामिल हैं। ये सुकमा, माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमा से जुड़े इलाकों में कई गंभीर घटनाओं में लिप्त रहे हैं, जिनमें सुरक्षा बलों पर हमले और आईईडी विस्फोट शामिल हैं, जिनमें कई जवान शहीद हुए।

आत्मसमर्पण करने वालों में लाली उर्फ मुचाकी आयते जैसी प्रमुख महिला शामिल है, जो एक प्लाटून डिप्टी कमांडर थी और जिस पर 10 लाख का इनाम था। अन्य में हेमला लखमा, आसमिता उर्फ कमलू और कई युवा कैडर शामिल हैं, जो मिलिशिया या पार्टी मेंबर के रूप में कार्य कर रहे थे।

इस सफलता में डीआरजी सुकमा, इंटेलिजेंस ब्रांच, सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियन और कोबरा की सूचना शाखा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरकार की नीति के अनुसार सभी आत्मसमर्पित कैडरों को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

सुकमा पुलिस नक्सल मुक्त बस्तर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। लगातार चल रहे अभियानों से दूरदराज के जंगली इलाकों में विकास पहुँच रहा है। यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के अंत की ओर इशारा करता है। अन्य माओवादियों से भी अपील की गई है कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति का चयन करें।

Point of View

यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस की नीतियों ने माओवादी संगठन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया है। इस आत्मसमर्पण से यह संदेश मिलता है कि हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटना संभव है। देश की सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण से यह घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

छत्तीसगढ़ में माओवादियों का आत्मसमर्पण क्यों हुआ?
यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति और सुकमा पुलिस के अभियानों के प्रभाव के कारण हुआ।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में कौन-कौन शामिल थे?
आत्मसमर्पण करने वालों में विभिन्न रैंक के माओवादी थे, जिनमें एक सीवाईपीसीएम, एक डीवीसीएम, तीन पीपीसीएम, तीन एसीएम और 18 पार्टी मेंबर शामिल थे।
सरकार आत्मसमर्पित माओवादियों को क्या सहायता देगी?
सरकार आत्मसमर्पित माओवादियों को 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम और अन्य सुविधाएं प्रदान करेगी।
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