क्या छत्तीसगढ़ में 36 इनामी सहित 63 माओवादियों ने सरेंडर किया, सीएम साय ने पीएम मोदी के नेतृत्व का किया उल्लेख?
सारांश
Key Takeaways
- 36 इनामी सहित 63 माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
- यह आत्मसमर्पण विश्वास और परिवर्तन का प्रतीक है।
- बस्तर में शांति और विकास की नींव रखी जा रही है।
- सीएम ने पीएम मोदी के नेतृत्व का उल्लेख किया।
- सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद का सफाया करना है।
रायपुर, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों ने मुख्यधारा में शामिल होने का एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह सिर्फ एक आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि विश्वास, परिवर्तन और नए जीवन की ओर एक सार्थक कदम है।
सीएम साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि शांति और विकास की दिशा में यह एक और मजबूत कदम है, जिससे बस्तर का स्वर्णिम कल लिखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को बस्तर के दंतेवाड़ा में 'पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों, जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं, ने हिंसा और भटकाव का मार्ग छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
इसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का यह प्रत्यक्ष परिणाम है। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से यह सिद्ध हुआ है कि बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार की सटीक नीति और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण आज नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। माओवादी नेक्सस का प्रभावी विघटन हो चुका है और दंतेवाड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी तेजी से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। बस्तर में अब शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के रास्ते पर चल रहे लोगों को कई बार चेतावनी दी है और हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जल्द ही देश से नक्सलियों का सफाया होना निश्चित है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के हमारे दृढ़ संकल्प का प्रतिबिंब है।