30 सितंबर 2026
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कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव की 9वीं DNSA बैठक वर्चुअली संपन्न, हिंद महासागर सुरक्षा पर 6 देशों का संकल्प

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कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव की 9वीं DNSA बैठक वर्चुअली संपन्न, हिंद महासागर सुरक्षा पर 6 देशों का संकल्प

सारांश

भारत की मेजबानी में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव की 9वीं DNSA बैठक वर्चुअली आयोजित हुई, जिसमें 6 हिंद महासागर देशों ने समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत और क्षमता निर्माण पर सहयोग को मज़बूत करने का संकल्प दोहराया। 2025-26 के रोडमैप की समीक्षा और NSA स्तर के पिछले फैसलों पर प्रगति का मूल्यांकन बैठक के केंद्र में रहा।

मुख्य बातें

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) की 9वीं DNSA बैठक 30 सितंबर 2026 को वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई।
भारत, बांग्लादेश, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और सेशेल्स ने बैठक में भाग लिया।
20 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई 7वीं NSA बैठक के निर्णयों की समीक्षा की गई।
भारत का नेतृत्व रणनीतिक मामलों के DNSA पवन कपूर ने और CSC सचिवालय का प्रतिनिधित्व वाइस एडमिरल एस.एन.
घोरमाडे (सेवानिवृत्त) ने किया।
सदस्य देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और HADR साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमति जताई।

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) की 9वीं उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (DNSA) स्तर की बैठक 30 सितंबर 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, जिसकी मेजबानी भारत ने की। इस बैठक में बांग्लादेश, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडलों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बैठक की जानकारी सार्वजनिक की।

बैठक का एजेंडा और समीक्षा

बैठक में 20 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित CSC की 7वीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) स्तर की बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। साथ ही, 2025-26 के लिए तैयार किए गए 'सहयोग और गतिविधियों के रोडमैप' की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

सदस्य देशों ने सहयोग के पाँच प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इन गतिविधियों का केंद्रीय उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समग्र सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना है।

प्रमुख प्रतिनिधिमंडल और नेतृत्व

भारत की ओर से रणनीतिक मामलों के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल की कमान प्रधानमंत्री कार्यालय के सशस्त्र बल प्रभाग के महानिदेशक ब्रिगेडियर जनरल मुहम्मद अली हैदर सिद्दीकी ने संभाली।

मालदीव का नेतृत्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल हमीद शफीग (सेवानिवृत्त) ने किया, जबकि मॉरीशस की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय में सुरक्षा मामलों के कार्यवाहक प्रधान समन्वयक के. जयप्रकाश उपस्थित रहे। सेशेल्स के राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जोएल मॉर्गन और श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पी.डी. इंदिका एल. विजेगुनावर्धना ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया।

गौरतलब है कि CSC सचिवालय की ओर से महासचिव वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमाडे (सेवानिवृत्त) ने बैठक में भाग लिया, जिन्होंने हाल ही में कोलंबो, श्रीलंका में CSC महासचिव का पदभार ग्रहण किया है।

हिंद महासागर सुरक्षा पर साझा संकल्प

बैठक में सदस्य देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरों और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर आपसी समन्वय को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

यह बैठक ऐसे समय में संपन्न हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में बड़ी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति के बीच क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा समन्वय की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। आलोचकों का कहना है कि वर्चुअल प्रारूप में बैठकों की तुलना में आमने-सामने की कूटनीति अधिक प्रभावी परिणाम देती है, हालाँकि अधिकारियों ने इस बैठक को उत्पादक बताया है।

क्या होगा आगे

CSC के अगले चरण की गतिविधियाँ 2025-26 के रोडमैप के अनुरूप आगे बढ़ेंगी, जिसमें क्षमता निर्माण कार्यशालाओं और संयुक्त अभ्यासों की योजना शामिल है। क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग का यह मंच हिंद महासागर में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका संदर्भ महत्वपूर्ण है — हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति के बीच भारत इस मंच के ज़रिए अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को ठोस सुरक्षा ढाँचे में तब्दील कर रहा है। हालाँकि वर्चुअल प्रारूप और बयानों की सांकेतिक भाषा यह सवाल उठाती है कि क्या यह मंच वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों के लिए पर्याप्त रूप से सक्रिय है। बांग्लादेश और मालदीव के साथ हाल के राजनयिक उतार-चढ़ाव के बाद इन देशों की भागीदारी खुद में एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली कसौटी 2025-26 के रोडमैप का ज़मीनी क्रियान्वयन होगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव (CSC) क्या है?
कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र के देशों का एक बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग मंच है, जिसमें भारत, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और सेशेल्स शामिल हैं। यह मंच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी, साइबर सुरक्षा और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
9वीं DNSA बैठक में क्या प्रमुख निर्णय लिए गए?
बैठक में 20 नवंबर 2025 की NSA स्तर की बैठक के निर्णयों की समीक्षा की गई और 2025-26 के सहयोग रोडमैप पर हुई प्रगति का मूल्यांकन किया गया। सदस्य देशों ने पाँच प्रमुख स्तंभों के तहत क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भारत की ओर से रणनीतिक मामलों के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। CSC सचिवालय की ओर से महासचिव वाइस एडमिरल एस.एन. घोरमाडे (सेवानिवृत्त) ने बैठक में भाग लिया।
हिंद महासागर क्षेत्र में CSC का महत्व क्यों बढ़ रहा है?
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा खतरों, प्राकृतिक आपदाओं और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों के बढ़ते दबाव के बीच CSC जैसे बहुपक्षीय मंच की प्रासंगिकता बढ़ी है। सदस्य देश मानवीय सहायता, आपदा राहत और क्षमता निर्माण में आपसी सहयोग को नियमित रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।
CSC की अगली बैठक कब और किस स्तर पर होगी?
अगली बैठक की तिथि और स्तर की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आगामी गतिविधियाँ 2025-26 के रोडमैप के अनुरूप आयोजित की जाएंगी, जिसमें संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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