भारत-डेनमार्क पहला समुद्री सुरक्षा संवाद कोपेनहेगन में संपन्न, इंडो-पैसिफिक सहयोग पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और डेनमार्क के बीच पहला समुद्री सुरक्षा संवाद (Maritime Security Dialogue) इस सप्ताह कोपेनहेगन में आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य — विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र में उभरती चुनौतियों — पर गहन विचार-विमर्श किया। डेनमार्क स्थित भारतीय दूतावास ने 19 जून 2026 को इस संवाद की पुष्टि की।
प्रतिनिधिमंडल और मुलाकात का विवरण
विदेश मंत्रालय (MEA) के डी एंड आईएसए डिवीजन की संयुक्त सचिव सुभाषिनी नारायणन के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस संवाद में हिस्सा लिया। प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के प्रतिनिधि भी शामिल थे। भारत के राजदूत मनीष प्रभात की उपस्थिति में यह प्रतिनिधिमंडल डेनमार्क की स्टेट सेक्रेटरी लोटे माचोन, समुद्री सुरक्षा दूत निकोलाई रूगे और डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिला।
दूतावास ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
डेनमार्क के राजदूत की प्रतिक्रिया
डेनमार्क के भारत में राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, 'समुद्री सुरक्षा भारत और डेनमार्क दोनों के लिए बढ़ती चिंता का विषय है।' उन्होंने बताया कि संवाद के अंतर्गत समुद्री क्षेत्र में कार्यरत डेनिश रक्षा कंपनियों के साथ एक कार्यकारी लंच भी आयोजित किया गया, जो रक्षा-औद्योगिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
यह संवाद उस व्यापक कूटनीतिक ढाँचे का हिस्सा है जिसकी नींव मई में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में रखी गई थी। उस शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ डेनमार्क की कार्यवाहक प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन मजोल फ्रॉस्टाडॉटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने संयुक्त बयान जारी कर समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
गौरतलब है कि नॉर्वे के साथ भी इसी तरह का समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू किया गया है, जो भारत की नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ती सुरक्षा साझेदारी को रेखांकित करता है।
इंडो-पैसिफिक और अंतरराष्ट्रीय कानून पर प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों — विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) — के अनुरूप एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके तहत इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) और 'महासागर' (MAHASAGAR — Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अंतर्गत मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
अवैध समुद्री गतिविधियों पर फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने अवैध समुद्री गतिविधियों से उत्पन्न चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया। इनमें समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध और अनियमित मछली पकड़ना, समुद्री प्रदूषण और नाविकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर सूचना साझाकरण और एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
यह संवाद भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' से आगे बढ़कर यूरोपीय सुरक्षा साझेदारियों को गहरा करने की रणनीति का हिस्सा है, और आने वाले समय में इस द्विपक्षीय ढाँचे के और विस्तार की संभावना है।