अमेरिकी सैन्य एआई विफलता पर तीन सीनेटरों की जांच मांग, ईरान हमले में पुराने डेटा का इस्तेमाल उजागर
सारांश
मुख्य बातें
तीन वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटरों ने 22 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना और खुफिया अभियानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की कथित विफलताओं की तत्काल जांच की मांग की है। सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि गलत या पुराने डेटा पर आधारित एआई प्रणालियाँ घातक सैन्य गलतियों को जन्म दे सकती हैं।
कौन हैं जांच की मांग करने वाले सीनेटर
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सीनेटर मार्क वार्नर, सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के रैंकिंग सदस्य सीनेटर जैक रीड, और सीनेट की रक्षा सबकमेटी में डेमोक्रेट्स के नेतृत्वकर्ता सीनेटर क्रिस कून्स ने संयुक्त रूप से यह मांग उठाई है। तीनों ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन को पत्र लिखकर इंस्पेक्टर जनरल को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जांच करने की अनुमति देने की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम: दो कथित एआई विफलताएँ
सीनेटरों ने अपने पत्र में दो सार्वजनिक रिपोर्टों का हवाला दिया है। पहले मामले के अनुसार, ईरान के मिनाब में अमेरिकी हमले के दौरान एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने कथित तौर पर पुराने भौगोलिक डेटा का इस्तेमाल किया था। दूसरे मामले में, स्पेशल ऑपरेशंस कमांड पैसिफिक द्वारा फैलाई गई खुफिया जानकारी में एआई-जनित गलत सूचना शामिल हो जाने के कारण एक सैन्य अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा।
गौरतलब है कि सीनेटरों ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनके द्वारा जारी सामग्री में इन दोनों घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मिनाब हमले या रोके गए मिशन के बारे में उन्होंने अतिरिक्त विवरण भी सार्वजनिक नहीं किया है।
पेंटागन और एआई कंपनी पर आरोप
सीनेटरों ने पेंटागन पर एक बड़ी अमेरिकी एआई कंपनी पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है — हालांकि बयान में कंपनी का नाम नहीं बताया गया। उनके अनुसार, यह कंपनी अपनी तकनीक को पूर्णतः स्वायत्त (ऑटोनॉमस) हमलों में इस्तेमाल करने की अनुमति देने से परहेज कर रही थी। तीनों सीनेटरों ने पत्र में लिखा, 'ये संभावित गलतियाँ, इस पृष्ठभूमि में कि रक्षा विभाग ने एक प्रमुख अमेरिकी एआई कंपनी को परेशान किया क्योंकि वह अपने प्रोडक्ट को पूरी तरह ऑटोनॉमस हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देना चाहती थी, इनकी इंस्पेक्टर जनरल द्वारा तुरंत जांच होनी चाहिए।'
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना निगरानी डेटा प्रोसेस करने, पैटर्न पहचानने और ऑपरेशनल निर्णयों में सहायता के लिए तेजी से एआई पर निर्भर होती जा रही है।
नीतिगत आलोचना और निगरानी का सवाल
सीनेटरों ने सरकार द्वारा नेशनल सिक्योरिटी मेमोरेंडम 25 को रद्द किए जाने और रक्षा विभाग की एक ऐसी रणनीति की आलोचना की है, जो उनके अनुसार, निगरानी संबंधी आवश्यकताओं को एआई के त्वरित अपनाने में बाधा मानती है। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर 'मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स' वाला तरीका चल सकता है, लेकिन इससे गंभीर ऑपरेशनल गलतियाँ हो सकती हैं।'
सीनेटरों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध एआई के इस्तेमाल से नहीं, बल्कि अपर्याप्त मानवीय निगरानी से है। उन्होंने लिखा, 'एआई का विश्लेषण और अन्य क्षेत्रों में सही इस्तेमाल है, लेकिन मजबूत मानकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी खुफिया प्रोडक्ट में एआई-जनित गलतियाँ न हों — खासकर जब ऐसी खुफिया जानकारी परमाणु हथियार वाले दुश्मन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का कारण बन सकती है।'
भारत और सहयोगी देशों पर संभावित असर
इस विवाद का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे भारत सहित अमेरिका के रक्षा सहयोगी खुफिया साझेदारी और एआई-आधारित रक्षा तकनीकों में सहयोग बढ़ा रहे हैं, एआई प्रणालियों की विश्वसनीयता और जवाबदेही का मुद्दा उनकी सुरक्षा नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। सीनेटरों ने जांचकर्ताओं से इन दोनों घटनाओं के साथ-साथ यह भी पता लगाने को कहा है कि क्या एआई टारगेटिंग से जुड़ी अन्य बड़ी विफलताएँ भी हुई हैं जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हो सकी हैं।