चेन्नई में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर ₹3,200 पार, इडली-डोसा समेत खाने के दाम 40% तक बढ़ने की आशंका
सारांश
Key Takeaways
चेन्नई के रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं, क्योंकि 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत चेन्नई में ₹3,200 से ऊपर पहुँच गई है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, इस मूल्य वृद्धि के चलते सामान्य नाश्ते की वस्तुओं जैसे इडली और डोसा के दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
मुख्य घटनाक्रम
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद चेन्नई के रेस्तरां संचालकों के सामने परिचालन लागत में तेज़ उछाल की चुनौती खड़ी हो गई है। उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, पोंगल की एक थाली जो अभी ₹80 में मिलती है, वह बढ़कर लगभग ₹115 हो सकती है। इसी तरह डोसे की कीमत ₹150 से बढ़कर ₹200 से अधिक हो सकती है। गौरतलब है कि इसके विपरीत, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे व्यावसायिक और घरेलू उपयोगकर्ताओं के बीच लागत का अंतर और भी गहरा हो गया है।
रेस्तरां संचालकों पर असर
रेस्तरां संचालकों का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत को वहन करने की उनकी क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे उन्हें यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डालना अनिवार्य हो गया है। कई प्रतिष्ठान रोज़ाना खाना पकाने के लिए एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं — कुछ प्रतिष्ठान प्रतिदिन 5 से 10 सिलेंडर तक की खपत करते हैं। इस दबाव में कुछ रेस्तरां ने गैस की अधिक खपत वाले व्यंजनों की तैयारी कम कर दी है। हालाँकि बिजली से खाना पकाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, लेकिन बिजली की महंगी दरों ने इस बदलाव को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य बना दिया है।
हॉस्टल और पेइंग गेस्ट आवास भी प्रभावित
इस संकट का असर केवल रेस्तरां तक सीमित नहीं है। चेन्नई के निजी हॉस्टल और पेइंग गेस्ट आवास भी बढ़ती लागत की मार झेल रहे हैं, क्योंकि वे खाना पकाने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब तेल कंपनियाँ ऐसे कई ऑपरेटरों को औपचारिक रूप से वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के रूप में मान्यता नहीं देतीं, जिससे उन्हें निजी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति अनियमित हो गई है और कमी के दौरान कीमतें और भी अधिक बढ़ जाती हैं।
उद्योग की माँगें और आगे की राह
आतिथ्य सत्कार क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने सरकार से बिजली दरों में कमी और कर रियायतों सहित ठोस राहत उपायों की माँग की है। उनका कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने या क्षेत्र विशेष को आर्थिक सहायता देने के कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल आम उपभोक्ताओं के लिए खाद्य वस्तुएँ और महंगी होंगी, बल्कि लघु एवं मध्यम श्रेणी के खाद्य उद्यमों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है। यह Nवीं ऐसी स्थिति है जब ईंधन मूल्य वृद्धि ने चेन्नई के खाद्य उद्योग को सीधे प्रभावित किया है, और सरकारी हस्तक्षेप की माँग तेज़ होती जा रही है।