कांग्रेस की खानदानी समस्या: सुधांशु त्रिवेदी का तीखा हमला
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नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध-प्रदर्शन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि समिट में एक ओर हमारी युवा शक्ति की शैक्षणिक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन हुआ, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस की निम्नता और नग्नता का कुटिल प्रदर्शन सामने आया।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश व्याप्त है और कांग्रेस पार्टी के गठबंधन सहयोगियों ने भी इस पर आपत्ति उठाई है। अब कांग्रेस पार्टी के अंदर से भी आवाजें उठने लगी हैं कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में गरिमापूर्ण आचरण अपेक्षित होता है। ऐसे आयोजनों में इस प्रकार का हल्का और निंदनीय व्यवहार करना अत्यंत अनुचित है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस की पूर्व नेता और केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा ने भी यह स्वीकार किया है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में जिम्मेदारी का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी को गरिमा और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसलिए हमें यह स्पष्ट करना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी को समझना चाहिए कि उनके विचारों को जनता और गठबंधन सहयोगी दोनों ने नकार दिया है, और अब पार्टी के भीतर भी वरिष्ठ नेता उन्हें अस्वीकार कर रहे हैं। जनता ने उन्हें पूरी तरह से ठुकरा दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या कांग्रेस के अंदर की नहीं, बल्कि यह एक खानदानी समस्या है। मैं यह कहना चाहूंगा कि यह समस्या कांग्रेस के नेताओं से अधिक, कांग्रेस के परिवार की समस्या है। एक समय था जब भारत को सपेरों का देश कहा जाता था। 28 सितंबर 1955 को जब जवाहरलाल नेहरू से पूछा गया था कि क्या भारत को सपेरों का देश कहना उचित है, तो उन्होंने कहा था कि इसमें कोई बुराई नहीं है, क्योंकि इससे पर्यटकों की संतुष्टि होती है। इसका मतलब यह है कि आप भारत की उसी पहचान को बनाए रखना चाहते थे। इसीलिए जब आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एआई की नई ऊँचाई की ओर बढ़ रहा है, तो यह आपको सहन नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस खानदानी समस्या का इलाज देश की जनता करेगी। समस्या यह है कि जो भी लोग उनकी पार्टी या गठबंधन के साथी उन्हें समझाना चाहते हैं, उनकी बातें वे सुनना नहीं चाहते।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महीने पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा था कि राज्य में पूंजी निवेश के लिए पर्याप्त धन नहीं है, फिर भी उन्होंने कहा कि वे गांधी परिवार और कांग्रेस के लिए 1,000 करोड़ रुपए खर्च करने को तैयार हैं। जब हम राज्य सरकार में थे, तब हमने गुजरात मॉडल पेश किया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई थी। अब कांग्रेस को जवाब देना होगा कि उन्होंने शासन का कौन सा मॉडल पेश किया है?
सुधांशु त्रिवेदी ने यह सवाल उठाया कि कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता में है और तीन राज्यों में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार चला रही है, जैसे हिमाचल, तेलंगाना और कर्नाटक। हमने गुजरात मॉडल प्रस्तुत किया है। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं, आपका मॉडल क्या है? आपने कर्नाटक का कौन सा मॉडल देश के सामने रखा है? हिमाचल का कौन सा मॉडल पेश किया है? दिखाइए, प्रदर्शन करके बताइए।
तेलंगाना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वहां कांग्रेस की राजनीति की परिभाषा अलग तरीके से पेश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज इन बयानों के बाद कोई किंतु-परंतु नहीं रह गया है और उनके अनुसार कांग्रेस न केवल राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहती है, बल्कि जिन राज्यों में सत्ता में रहती है, वहां की जनता का भी भारी अहित करती है।