31 अक्टूबर 2026
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दिल्ली-एनसीआर में CPCB की सख्ती: प्रदूषण नियंत्रण उपकरण रहित उद्योगों को बंद करने का आदेश

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दिल्ली-एनसीआर में CPCB की सख्ती: प्रदूषण नियंत्रण उपकरण रहित उद्योगों को बंद करने का आदेश

सारांश

सर्दियों के मुहाने पर CPCB ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण न लगाने वाले उद्योगों पर शिकंजा कसा है — 5 दिन में वर्क ऑर्डर नहीं तो संचालन बंद। 1 अक्टूबर से लागू कड़े उत्सर्जन मानकों के बाद यह सबसे बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 31 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में APCD रहित उद्योगों के खिलाफ बंद करने का निर्देश जारी किया।
APCD वर्क ऑर्डर न देने वाली इकाइयों को तत्काल 'कारण बताओ नोटिस' जारी होगा; 5 दिन में जवाब न मिलने पर संचालन बंद।
यह निर्देश 'वायु अधिनियम, 1981' की धारा 18(1)(बी) और CAQM निर्देश संख्या 98 के तहत जारी किया गया।
1 अक्टूबर 2026 से 50 एमजी/एनएम³ का संशोधित उत्सर्जन मानक लागू हो चुका है।
राज्य बोर्डों और DPCC को हर सप्ताह CPCB को प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।
CPCB ने उद्योगों के पंजीकरण और APCD की स्थिति ट्रैक करने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 31 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में 'एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस' (APCD) न लगाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) तथा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को आदेश दिया है कि ऐसी लापरवाह इकाइयों को तत्काल 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया जाए और पाँच दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर संचालन बंद कर दिया जाए।

निर्देश की कानूनी पृष्ठभूमि

'वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981' की धारा 18(1)(बी) के तहत यह निर्देश जारी किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब 1 अक्टूबर 2026 से 50 एमजी/एनएम³ का संशोधित उत्सर्जन मानक लागू हो चुका है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश संख्या 98 (संशोधित) के दायरे में आने वाले सभी उद्योगों के लिए इन मानकों का पालन अनिवार्य है।

गौरतलब है कि यह कदम सर्दियों की शुरुआत के साथ उठाया गया है — वह मौसम जब दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सबसे खराब स्तर पर पहुँचता है और लाखों निवासियों का जनजीवन प्रभावित होता है।

मुख्य निर्देश और अनुपालन प्रक्रिया

CPCB के निर्देश के अनुसार, राज्य बोर्डों और DPCC को उन सभी औद्योगिक इकाइयों को तत्काल 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना होगा जिन्होंने APCD लगाने या अपग्रेड करने के लिए वर्क ऑर्डर नहीं दिए हैं, और जो 'पर्याप्तता मूल्यांकन रिपोर्ट' या छूट प्रमाण पत्र प्राप्त करने में भी विफल रही हैं। यदि संबंधित इकाई पाँच दिनों के भीतर वर्क ऑर्डर का संतोषजनक प्रमाण या वैध छूट प्रमाण पत्र पेश नहीं करती, तो उसके खिलाफ 'संचालन बंद करने के आदेश' जारी किए जाएँगे।

बंद की गई इकाइयाँ तब तक पुनः संचालित नहीं होंगी, जब तक वे आवश्यक वर्क ऑर्डर नहीं देतीं और अनुपालन के लिए एक विश्वसनीय समय-सीमा प्रस्तुत नहीं करतीं, जिसे संबंधित बोर्ड द्वारा स्वीकार कर लिया जाए।

निगरानी तंत्र और साप्ताहिक रिपोर्टिंग

CPCB ने स्पष्ट किया है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और DPCC को प्रत्येक सप्ताह की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण CPCB को सौंपना होगा। इसके अलावा, उद्योगों के पंजीकरण और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना व उन्नयन की निगरानी के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार किया गया है।

CPCB ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य बोर्ड और DPCC इस निर्देश की प्राप्ति की तत्काल पुष्टि करें और नियमों का पालन न करने वाले उद्योगों की यूनिट-वार पूरी सूची बोर्ड के साथ साझा करें।

आम जनता पर असर

दिल्ली-एनसीआर में औद्योगिक प्रदूषण वायु गुणवत्ता को बिगाड़ने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्सर्जन मानकों का कड़ाई से पालन न केवल वायु प्रदूषण को घटाएगा, बल्कि क्षेत्र में श्वसन और हृदय संबंधी बीमारियों का बोझ भी कम करेगा। यह निर्देश उस समय आया है जब क्षेत्र में पराली जलाने और ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ने लगता है।

आगे की राह

अब सभी संबंधित राज्य बोर्डों पर यह दायित्व है कि वे CPCB के इस निर्देश को समयबद्ध तरीके से लागू करें और साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट सौंपें। उद्योग जगत के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि APCD की स्थापना में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य बोर्ड इस आदेश को ज़मीन पर कितनी कठोरता से लागू करते हैं — क्योंकि अतीत में ऐसे निर्देश कागज़ों तक ही सीमित रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा राज्य बोर्डों की इच्छाशक्ति की होगी — जिनका अतीत में प्रवर्तन का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। दिल्ली-एनसीआर हर सर्दी प्रदूषण संकट झेलता है, और हर बार नए निर्देश जारी होते हैं, लेकिन ज़मीनी बदलाव सीमित रहा है। साप्ताहिक रिपोर्टिंग और ऑनलाइन पोर्टल जैसे तंत्र जवाबदेही की दिशा में सही कदम हैं, पर इनकी सफलता डेटा की पारदर्शिता और स्वतंत्र सत्यापन पर निर्भर है। जब तक अनुपालन की सार्वजनिक रिपोर्टिंग नहीं होती और बड़े उद्योगों पर भी बराबरी से कार्रवाई नहीं होती, यह आदेश उन दर्जनों पूर्व निर्देशों की सूची में जुड़ जाएगा जो मौसम बदलते ही भुला दिए गए।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CPCB ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को बंद करने का आदेश क्यों दिया?
CPCB ने यह आदेश उन औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ दिया है जिन्होंने 'एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस' (APCD) लगाने या अपग्रेड करने के लिए वर्क ऑर्डर नहीं दिए हैं। 1 अक्टूबर 2026 से संशोधित उत्सर्जन मानक (50 एमजी/एनएम³) लागू होने के बाद भी लापरवाही जारी रहने पर यह सख्त कदम उठाया गया है।
इन उद्योगों को बंद होने से बचने के लिए क्या करना होगा?
संबंधित उद्योगों को 'कारण बताओ नोटिस' मिलने के 5 दिनों के भीतर APCD वर्क ऑर्डर का संतोषजनक प्रमाण, या वैध छूट प्रमाण पत्र अथवा 'पर्याप्तता मूल्यांकन रिपोर्ट' प्रस्तुत करनी होगी। ऐसा न करने पर संचालन बंद करने के आदेश जारी किए जाएँगे।
यह निर्देश किन राज्यों पर लागू होता है?
यह निर्देश दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के साथ-साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर लागू होता है, जो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आते हैं।
बंद की गई इकाइयाँ दोबारा कब चालू हो सकेंगी?
बंद इकाइयाँ तभी पुनः संचालित हो सकेंगी जब वे आवश्यक APCD वर्क ऑर्डर दे दें और अनुपालन के लिए एक विश्वसनीय समय-सीमा प्रस्तुत करें, जिसे संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्वीकार कर लिया जाए।
CPCB अनुपालन की निगरानी कैसे करेगा?
CPCB ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है जो उद्योगों के पंजीकरण और APCD की स्थापना की स्थिति ट्रैक करेगा। इसके अलावा, राज्य बोर्डों और DPCC को हर सप्ताह की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट CPCB को सौंपनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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