दरभंगा में नाबालिग के अपहरण-दुष्कर्म मामले में दो गिरफ्तार, एफआईआर के चार घंटे में पुलिस की कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज होने के महज चार घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में एक किशोर को भी हिरासत में लिया गया है और घटना में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल व एक मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 24 सितंबर 2026 को दोपहर करीब तीन बजे पीड़िता, आरोपी और उसका सहयोगी मोटरसाइकिल से दरभंगा रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। वहाँ तीनों को संदिग्ध स्थिति में देखकर जीआरपी पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए जीआरपी थाना लाया।
जीआरपी थाने ने पीड़िता और आरोपी दोनों पक्षों के परिजनों को फोन पर सूचित किया, जिसके बाद दोनों परिवार थाने पहुँचे। पुलिस अभिरक्षा में रखे गए तीनों को उस दिन पीआर बॉन्ड पर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया और एक सनहा दर्ज किया गया। हालाँकि, अगले दिन 25 सितंबर को बिरौल थाने में पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर अपहरण और दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में बाकायदा मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रविन्द्र मांझी उर्फ प्रवीण मांझी और उसके पिता जामुन मांझी को गिरफ्तार किया है। दोनों मजरगाही गाँव के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, जामुन मांझी पर पीड़िता के परिजनों के साथ मारपीट करने और पुलिस पदाधिकारी के समक्ष उन्हें धमकी देने का भी आरोप है।
मामले में एक किशोर को भी निरुद्ध किया गया है, जिसे किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत संभाला जा रहा है।
जाँच में सामने आए तथ्य
दरभंगा पुलिस की जाँच में कथित तौर पर यह सामने आया है कि पीड़ित और आरोपी पक्ष आपस में रिश्तेदार हैं और मामला एक कथित प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो सकता है। हालाँकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चूँकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए दर्ज आरोपों के आधार पर विधिसम्मत जाँच आगे बढ़ाई जाएगी और किसी भी परिस्थिति में कानूनी प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जाएगा।
बरामदगी और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने मामले में घटना में इस्तेमाल एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जो जाँच में अहम साक्ष्य माने जा रहे हैं। दोनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में नाबालिगों से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई की माँग लगातार उठती रही है। पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी को स्थानीय स्तर पर सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अदालती प्रक्रिया का परिणाम निर्णायक होगा।