दिल्ली CEO का मतदाता नामांकन अभियान: कॉलेजों में विशेष शिविर, 30 अक्टूबर तक फॉर्म-6 का मौका
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 7 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दो दिवसीय विशेष शिविर आयोजित किए, जिनका उद्देश्य मसौदा मतदाता सूची से छूटे हुए पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 के ज़रिए नामांकित कराना है। बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) ने छात्रों को फॉर्म भरने में सहायता की, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सवालों के जवाब दिए और भरे हुए आवेदन एकत्र किए।
अभियान का उद्देश्य और दायरा
चुनाव आयोग के बयान के अनुसार इस अभियान का नारा है — 'प्रत्येक पात्र मतदाता को जोड़ा जाए, और मतदाता सूची में कोई भी अपात्र प्रविष्टि न रहे।' यह अभियान गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा और विशेष रूप से युवा मतदाताओं के नामांकन को अधिकतम करने के लिए तैयार किया गया है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर 2026 को सभी छूटे हुए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत यह अभियान चलाया जा रहा है।
विस्थापित और ASDD मतदाताओं के लिए व्यवस्था
हाल ही में अपनी कॉलोनियों के विध्वंस के कारण विस्थापित हुए मतदाताओं के लिए भी अलग से विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। ऐसे नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने वर्तमान निवास स्थान पर स्थित शिविरों में पहुँचकर नामांकन कराएँ।
इसके अलावा, जिन मतदाताओं के नाम घर-घर सर्वेक्षण के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट (ASDD) की सूची में आए हों, उन्हें भी फॉर्म-6 भरकर नामांकन कराने का विकल्प दिया गया है। ASDD सूची दिल्ली CEO कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
दावा एवं आपत्ति अवधि और समय-सीमा
जिन मतदाताओं के नाम मसौदा सूची में नहीं हैं, वे 31 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 30 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। फॉर्म मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (AERO), BLO या निर्धारित मतदान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से जमा किए जा सकते हैं।
सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 30 नवंबर 2026 तक किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 12 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
BLO की घर-घर पहुँच और सत्यापन प्रगति
BLO उन मतदाताओं के घर भी जा रहे हैं जिनके लिए नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि उनके दस्तावेज़ घर पर ही एकत्र किए जा सकें और उन्हें कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े। बयान के अनुसार, 7 अक्टूबर तक मतदाताओं से प्राप्त दस्तावेज़ों के आधार पर 'मानचित्रण न होने' और 'तार्किक विसंगति' के 13,62,162 मामलों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
आगे की राह
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में आगामी चुनावी चक्र को लेकर मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशिता पर ध्यान केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा और विस्थापित मतदाताओं तक सीधी पहुँच बनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मज़बूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अंतिम मतदाता सूची के 12 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होने के साथ स्पष्ट होगा कि यह अभियान कितना प्रभावी रहा।