दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला: 25 साल पुराने मामले में सीबीआई जॉइंट डायरेक्टर और पुलिस अधिकारी दोषी
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड पुलिस अधिकारी दोषी ठहराए गए।
- मामला 2000 में आईआरएस अधिकारी के घर पर रेड से संबंधित है।
- अदालत ने इसे एक सोची-समझी साजिश माना।
- अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
- सजा पर सुनवाई जल्द होगी।
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक 25 वर्ष पुराने मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सीबीआई के एक वर्तमान जॉइंट डायरेक्टर और एक रिटायर्ड दिल्ली पुलिस अधिकारी को दोषी ठहराया है। यह मामला वर्ष 2000 में एक आईआरएस अधिकारी के निवास पर कथित तौर पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से की गई छापेमारी से संबंधित है।
अदालत ने अपने निर्णय में सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर रमनीश और रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस वीके पांडे को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएँ 323, 427, 448 और 34 के तहत दोषी पाया है। इस मामले का निर्णय तीस हजारी कोर्ट के जज शशांक नंदन भट्ट ने सुनाया।
यह मामला 1985 बैच के आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है, जो उस समय दिल्ली में डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एनफोर्समेंट के पद पर कार्यरत थे। अग्रवाल ने आरोप लगाया था कि 19 अक्टूबर 2000 को उनके घर पर की गई तलाशी और गिरफ्तारी पूरी तरह गलत और द्वेषपूर्ण थी।
अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि यह रेड केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी) के 28 सितंबर 2000 के आदेश को विफल करने के उद्देश्य से की गई थी। सीएटी ने अग्रवाल के निलंबन की चार सप्ताह के भीतर समीक्षा करने का निर्देश दिया था।
अदालत के अनुसार, इस आदेश का पालन करने के बजाय सीबीआई अधिकारियों ने 18 अक्टूबर 2000 की शाम को एक गुप्त बैठक की और अगले दिन सुबह अग्रवाल के घर पर छापा मारने और उन्हें गिरफ्तार करने की योजना बनाई। इस पूरी घटना को अदालत ने एक सोची-समझी साजिश के रूप में देखा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि इसमें शक्ति का दुरुपयोग भी स्पष्ट रूप से नजर आता है। अदालत ने माना कि अधिकारियों ने अपने पद का लाभ उठाकर एक निर्दोष अधिकारी को परेशान करने की कोशिश की। अब इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जल्द ही सजा पर सुनवाई होगी।