क्या शिक्षकों को कुत्तों की गिनती के लिए लगाया गया? दिल्ली सरकार ने शिकायत दर्ज की

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क्या शिक्षकों को कुत्तों की गिनती के लिए लगाया गया? दिल्ली सरकार ने शिकायत दर्ज की

सारांश

दिल्ली सरकार ने स्कूल शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती के लिए तैनात किए जाने के झूठे दावे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। जानिए इस मामले की सच्चाई क्या है और क्यों यह चर्चा का विषय बना है।

Key Takeaways

  • दिल्ली सरकार ने झूठी खबरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
  • सोशल मीडिया पर गलत जानकारी का बढ़ता उपयोग चिंताजनक है।
  • शिक्षा क्षेत्र में इस तरह की अफवाहें गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने झूठी जानकारी फैलाने और फेक स्टोरी बनाने की कोशिशों के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह दावा किया गया था कि शहर में स्कूल के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती के लिए तैनात किया जाएगा।

सूचना प्रचार निदेशालय के निदेशक सुशील सिंह ने मीडियाकर्मियों को बताया कि विभाग ने "फेक न्यूज" के खिलाफ अलर्ट जारी किया था। हालांकि, ऐसे एडिटेड वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री के पीछे की साजिश का पता लगाना जरूरी था।

उन्होंने कहा, "उन लोगों की भूमिका की जांच के लिए शिकायत दर्ज की गई है जिन्होंने इस साजिश को सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाया है।"

सिंह ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की आलोचना की और कहा कि पुलिस से जांच करने का अनुरोध किया गया है।

उन्होंने कहा, "सूचना और प्रचार निदेशालय आज मीडिया को संबोधित कर रहा है ताकि यह बताया जा सके कि कैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का गलत उपयोग और सरकारी फैसलों के बारे में नकली रील्स और वीडियो के जरिए झूठ फैलाया जा रहा है।"

सिंह ने कहा, "शिक्षा निदेशालय और सूचना और प्रचार निदेशालय का उद्देश्य सही बात बताना और यह समझाना है कि गलत जानकारी कैसे फैलती है। झूठी कहानी फैलाई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती का निर्देश दिया गया था।"

उन्होंने बताया कि कई रील्स सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की गईं, जिनमें कुछ लोग शिक्षकों की नकल कर रहे थे और कुत्तों की गिनती से संबंधित झूठे बयान दे रहे थे।

उन्होंने कहा, "यह दावा निराधार और मनगढ़ंत था, जिससे ऐसा लगा कि कोई आधिकारिक आदेश था, जबकि ऐसा कोई निर्देश नहीं था।"

यह झूठा दावा शिक्षा निदेशालय के एक रूटीन सर्कुलर को गलत तरीके से पेश करने से शुरू हुआ।

निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, "यह सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं थी। इसने जनता में गुस्सा पैदा किया और निदेशालय की स्थिति को कमजोर किया।"

Point of View

यह महत्वपूर्ण है कि हम सच्चाई को उजागर करें। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की झूठी कहानियाँ सिर्फ भ्रम पैदा करती हैं। हमें हमेशा तथ्यों के साथ रहना चाहिए और समाज को सही जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली सरकार ने क्यों शिकायत दर्ज की?
दिल्ली सरकार ने झूठी जानकारी फैलाने के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, जिसमें दावा किया गया था कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती के लिए तैनात किया जाएगा।
क्या यह दावा सच है?
नहीं, यह दावा निराधार और मनगढ़ंत है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई आधिकारिक निर्देश नहीं था।
इस मामले में पुलिस की भूमिका क्या है?
पुलिस को शिकायत मिली है और वे इस मामले की जांच कर रहे हैं ताकि झूठ फैलाने वालों की पहचान की जा सके।
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