दिल्ली हाईकोर्ट में शराब घोटाले पर सीबीआई की याचिका पर सुनवाई, केजरीवाल करेंगे रिक्यूजल की मांग
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।
- अरविंद केजरीवाल अपनी दलीलें पेश करेंगे।
- रिक्यूजल का अर्थ है जज का मामले से हटना।
- सीबीआई ने इसे राष्ट्रीय राजधानी के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया है।
- भ्रष्टाचार के स्पष्ट मामले का आरोप है।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कथित शराब घोटाले के मामले में अरविंद केजरीवाल सहित कई अन्य व्यक्तियों के आरोपमुक्त होने के फैसले के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। आम आदमी पार्टी के स्रोतों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य लोग सुनवाई कर रही न्यायाधीश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष रिक्यूजल की याचिका प्रस्तुत करेंगे।
कानूनी परिप्रेक्ष्य में, रिक्यूजल का अर्थ है कि किसी जज का मामले की सुनवाई से अलग होना। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल स्वयं अदालत में उपस्थित होकर अपनी दलील देंगे।
अरविंद केजरीवाल और अन्य ने पहले भी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले को दूसरी बेंच में स्थानांतरित करने की मांग की थी, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। हालांकि, बेंच बदलने की मांग पर केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की है।
दिल्ली आबकारी नीति मामले में, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 23 लोगों को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर 9 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह राष्ट्रीय राजधानी का एक महत्वपूर्ण घोटाला है। वैज्ञानिक जांच की गई है और साजिश के सभी पहलुओं को प्रमाणित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट मामला है, जिसमें रिश्वत देने, लेने, स्वीकार करने और उपयोग करने का मामला है।
सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि हवाला के माध्यम से विभिन्न किश्तों में धन का हस्तांतरण किया गया था। सभी प्रमुख गवाहों से मजिस्ट्रेट के सामने पूछताछ की गई और 164 के तहत बयान दर्ज किए गए। मामले में ऐसे गवाह हैं जो स्पष्ट रूप से बताते हैं कि साजिश कैसे रची गई, रिश्वत किसको दी गई और कैसे दी गई। हमारे पास ईमेल और व्हाट्सएप चैट भी हैं। यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है।