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क्या दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए 3,500 करोड़ की आवश्यकता है जबकि एमसीडी के पास केवल 70 करोड़ हैं?

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क्या दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए 3,500 करोड़ की आवश्यकता है जबकि एमसीडी के पास केवल 70 करोड़ हैं?

सारांश

दिल्ली की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर हमला किया है। एमसीडी के पास कूड़े के समाधान के लिए आवश्यक धन की कमी है। क्या केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस समस्या का समाधान कर पाएंगी?

मुख्य बातें

दिल्ली को कूड़ा मुक्त करने के लिए 3,500 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।
एमसीडी के पास केवल 70 करोड़ रुपए हैं।
सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
भाजपा का सफाई अभियान केवल दिखावा बनकर रह गया है।
केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर समस्या का समाधान करना होगा।

नई दिल्ली, 21 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए एमसीडी के पास धन की कमी पर भाजपा को कठोर शब्दों में जवाब दिया है।

एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा की चार इंजन वाली सरकार के बावजूद एमसीडी के पास पर्याप्त धन नहीं है। बुधवार को आयोजित स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में एमसीडी आयुक्त ने बताया कि कूड़े के निपटारे के लिए 3,500 करोड़ रुपए की आवश्यकता है, जबकि एमसीडी केवल 70 करोड़ रुपए ही इकट्ठा कर पा रही है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में चारों ओर गंदगी फैली हुई है। भाजपा का दिल्ली को कूड़े से मुक्त कराने का अभियान केवल एक दिखावा बनकर रह गया है। सीएम और मेयर अपनी ही केंद्र सरकार से धन नहीं ला पा रहे हैं। आम आदमी पार्टी हमेशा से कहती आई है कि यह अभियान केवल दिखावे के लिए है। महापौर या मुख्यमंत्री उन क्षेत्रों में जाकर तस्वीरें खिंचवाते हैं, जो पहले से ही हमारे मेहनती सफाई कर्मचारियों द्वारा साफ किए गए होते हैं।

नारंग ने कहा कि बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में 18 सदस्यों (न सिर्फ आम आदमी पार्टी के, बल्कि भाजपा के पार्षदों) ने भी बताया कि सेंट्रल जोन में हर जगह कूड़ा बिखरा हुआ है। सेंट्रल जोन में कूड़ा उठाने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण पहले भी इस मुद्दे पर अभियान चलाए गए थे, यहां तक कि महापौर के कार्यालय के बाहर कूड़ा डालकर प्रदर्शन किया गया था, क्योंकि सेंट्रल जोन में कूड़ा उठाने के लिए आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने जोड़ा कि निगम आयुक्त ने भी माना कि सेंट्रल जोन, साउथ जोन और वेस्ट जोन में कूड़े की समस्या गंभीर है। मैंने सिविल लाइंस जोन का भी उल्लेख किया, जहां मजलिस पार्क और वजीराबाद के रामघाट में कूड़े का ढेर पड़ा है। यहाँ तक कि महापौर के निवास के आसपास भी कूड़ा जमा है। आयुक्त ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए 3,500 करोड़ रुपए की आवश्यकता है, जो निगम के पास नहीं हैं। हमें कंसेशनर को 90 करोड़ रुपए देने होते हैं, लेकिन केवल 70 करोड़ रुपए ही दे पाते हैं, जिससे कंसेशनर अपना काम सही से नहीं कर पा रहा है। टेंडर के लिए भी धन की कमी है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब केंद्र, दिल्ली सरकार और निगम तीनों उनके पास हैं, तो आयुक्त ने 3,500 करोड़ रुपए की कमी का रोना क्यों रोया, जब भाजपा की मुख्यमंत्री दिल्ली को कूड़ा-मुक्त करने का दावा करती हैं और प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान चला रहे हैं? क्या केंद्र और भाजपा सरकार निगम को 3,500 करोड़ रुपए देने के लिए तैयार नहीं हैं?

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें समझना चाहिए कि सफाई और स्वच्छता केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य का मुद्दा है। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली को कूड़ा मुक्त करने के लिए कितने पैसे की आवश्यकता है?
दिल्ली को कूड़ा मुक्त करने के लिए 3,500 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।
एमसीडी के पास वर्तमान में कितने पैसे हैं?
एमसीडी के पास केवल 70 करोड़ रुपए ही उपलब्ध हैं।
क्या भाजपा सरकार इस समस्या का समाधान करेगी?
भाजपा सरकार ने इस मुद्दे पर कई बार वादे किए हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
सफाई कर्मचारियों की स्थिति क्या है?
सफाई कर्मचारियों की स्थिति गंभीर है, उन्हें आवश्यक उपकरण और संसाधन नहीं मिल रहे हैं।
दिल्ली में कूड़े की समस्या कितनी गंभीर है?
दिल्ली में कूड़े की समस्या गंभीर है, खासकर सेंट्रल , साउथ और वेस्ट जोन में।
राष्ट्र प्रेस
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