क्या दिल्ली-एनसीआर में हवा फिर से जहरीली हो गई है?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 450 के पार जा चुका है।
- प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।
- हवा की गुणवत्ता में गिरावट का मुख्य कारण वाहनों का प्रदूषण है।
- सरकार ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
- समय पर उपाय न करने पर स्वास्थ्य संकट बढ़ सकता है।
नोएडा, 22 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। सर्दी की शुरूआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर का वातावरण एक बार फिर बेहद खतरनाक हो गया है। शनिवार को जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के अधिकांश निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 300 से 430 के बीच दर्ज किया गया है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर इससे कहीं अधिक चिंताजनक हो गया है।
कई स्थानों पर एक्यूआई 450 के पार चला गया है, जिसमें गाजियाबाद का लोनी क्षेत्र शामिल है। इस प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में कठिनाई और आंखों में जलन की समस्याएं बढ़ रही हैं। दिल्ली के आरके पुरम में एक्यूआई 372, रोहिणी में 412, विवेक विहार में 424, वज़ीरपुर में 427, सोनिया विहार में 369, श्री अरबिंदो मार्ग पर 305 और आनंद विहार में 420 मापा गया। शादिपुर का एक्यूआई 298 रहा, जो अन्य क्षेत्रों के मुकाबले थोड़ा बेहतर है, लेकिन फिर भी इसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा जाता है।
नोएडा का हाल और भी खराब है। सेक्टर 125 में एक्यूआई 430, सेक्टर 1 में 396, जबकि सेक्टर 62 में 343 दर्ज किया गया है। कई क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर पहुँच गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रदूषण के स्तर का लंबे समय तक बने रहना दमा, फेफड़ों की बीमारी, दिल की समस्याएं, और विशेषकर बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि सुबह और देर शाम खुले में घूमने से बचें, और घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें। प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञ मानते हैं कि हवा की गुणवत्ता में गिरावट के पीछे मुख्य कारणों में वाहनों का प्रदूषण, निर्माण कार्य, औद्योगिक धुआं, कूड़ा जलाना, और मौसम में नमी शामिल हैं।
ठंडी हवाओं के कारण प्रदूषक जमीन के निकट जमा हो रहे हैं, जिससे एक्यूआई तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली सरकार और स्थानीय प्रशासन ने वायु आपात स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। निर्माण कार्यों को सीमित करने, स्मॉग टावरों को सक्रिय रखने, और सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रदूषण के मूल कारणों को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक हालात में बड़े बदलाव की संभावना काफी कम है।