दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को CM रेखा गुप्ता की सख्त चेतावनी: किताबें-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदें, दबाव पर होगा टेकओवर तक
सारांश
Key Takeaways
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 30 अप्रैल 2026 को राजधानी के निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी किसी एक तय दुकान या विक्रेता से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। एक वीडियो संदेश के ज़रिए जारी इस चेतावनी में उन्होंने साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के विरुद्ध सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, और यदि आवश्यक हुआ तो स्कूल का अधिग्रहण (टेकओवर) भी किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री का निर्देश: क्या बदलेगा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिया कि दिल्ली के हर निजी स्कूल को अपने नोटिस बोर्ड, आधिकारिक वेबसाइट और स्कूल स्टोर — यदि कोई हो — पर स्पष्ट रूप से यह सूचना प्रदर्शित करनी होगी कि अभिभावक अपने बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, किताबें और स्टेशनरी कहीं से भी खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल सुविधा के लिए कुछ दुकानों के नाम सुझाव के रूप में दे सकते हैं, लेकिन यह बाध्यता नहीं होगी।
गौरतलब है कि यह कदम उन शिकायतों और सुझावों के आधार पर उठाया जा रहा है जो अभिभावकों ने सीधे मुख्यमंत्री को भेजे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अभिभावकों पर स्कूल-निर्धारित विक्रेताओं से महँगे दामों पर सामान खरीदने का दबाव बढ़ जाता है।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था को बिना किसी अपवाद के लागू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कहीं भी किसी तरह की गड़बड़ी, दबाव या मनमानी पाई गई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर स्कूल का टेकओवर भी एक विकल्प है।
रेखा गुप्ता ने जोड़ा कि उनका स्कूलों में निरीक्षण महज दिखावा नहीं, बल्कि नियमों को ज़मीन पर लागू कराने की ठोस कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली के किसी भी निजी स्कूल में कभी भी औचक निरीक्षण के लिए पहुँच सकती हैं।
अभिभावकों से सीधी अपील
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अनुरोध किया कि वे अपने सुझाव और शिकायतें लगातार भेजते रहें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहाँ-जहाँ गड़बड़ी की शिकायत मिलेगी, वह स्वयं वहाँ जाएँगी। उन्होंने कहा, ''दिल्ली को ठीक करना हमारी जिम्मेदारी है। मेरी दिल्ली, मेरी जिम्मेदारी।''
व्यापक संदर्भ: क्यों है यह मुद्दा अहम
निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को तय विक्रेताओं से सामान खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें दिल्ली में लंबे समय से उठती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इस व्यवस्था से स्कूल और विक्रेताओं के बीच अनुचित वित्तीय साँठगाँठ को बढ़ावा मिलता है, जिसकी कीमत अंततः आम अभिभावक चुकाते हैं। यह ऐसी Nवीं घटना है जब किसी राज्य सरकार को इस मुद्दे पर सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है।
आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि शिक्षा विभाग इन निर्देशों के अनुपालन की निगरानी कैसे करता है और क्या स्कूल प्रबंधन इन्हें गंभीरता से लागू करते हैं।