पश्चिम एशिया में संकट के बीच डीजी शिपिंग ने निर्यातकों को दी राहत, नाविकों को सुरक्षा निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- डीजी शिपिंग ने निर्यातकों को राहत देने के लिए निर्देश जारी किए हैं।
- बंदरगाह प्राधिकरण को छूट की प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच, नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने सभी बंदरगाहों को यह निर्देश दिया है कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ क्षेत्र में फंसे निर्यातकों को राहत देने के लिए आवश्यक छूट प्रदान की जाए।
एक जारी सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे कि डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, निर्यातकों तक एक समान पहुंच नहीं रही हैं।
डीजी शिपिंग ने यह भी निर्देश दिया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी गई सभी छूट को सीधे संबंधित हितधारकों, जैसे कि फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी, को पारदर्शी तरीके से दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ये हितधारक इसे निर्यातकों तक सफलतापूर्वक पहुंचाएं।
साथ ही, बंदरगाह प्राधिकरणों को यह भी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि टर्मिनल स्तर पर छूट की प्रक्रिया की निगरानी की जाए ताकि लाभ सही समय पर सही लोगों तक पहुंचे।
रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स को यह निर्देश दिया है कि वे इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे और निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें। यह कदम इस उद्देश्य से उठाया गया है कि निर्यातक 497 करोड़ रुपएरेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत अपना दावा कर सकें।
डीजी शिपिंग ने कहा, "शिपिंग कंपनियों को पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखनी चाहिए। इसके अलावा, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुसार नहीं हो सकता। इस विषय को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।
इस बीच, डीजी शिपिंग ने ईरान के समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा सलाह भी जारी की है।
इस सलाह में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, उन्हें घर के अंदर रहना चाहिए, संवेदनशील स्थानों से दूर रहना चाहिए और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहना चाहिए। वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना आवश्यकता के किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।
सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।