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क्या दिनाकरन ने भविष्य के चुनाव लड़ने से इनकार किया, डीएमके और विजय की आलोचना की?

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क्या दिनाकरन ने भविष्य के चुनाव लड़ने से इनकार किया, डीएमके और विजय की आलोचना की?

सारांश

टीटीवी दिनाकरन ने चुनाव लड़ने का इरादा न होने की पुष्टि की। उन्होंने पार्टी के उम्मीदवारों की जीत पर जोर दिया और पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को समर्थन दिया। जानें उनके बयान और राजनीतिक स्थिति के बारे में।

मुख्य बातें

दिनाकरन का चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है।
पार्टी को मजबूत करने पर जोर।
जयललिता की विरासत का सम्मान करने की अपील।
पन्नीरसेल्वम को समर्थन दिया।

चेन्नई, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के जनरल सेक्रेटरी टीटीवी दिनाकरन ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनका खुद चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। उनका मुख्य लक्ष्य है कि उनके साथ काम करने वाले लोग चुनाव जीतें और मंत्री बनें।

दिनाकरन ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी प्राथमिकता पार्टी को मजबूत करना और उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने खुद चुनाव लड़ने की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल पद पाना नहीं, बल्कि दूसरों को सत्ता तक पहुँचाना है।

उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि जो नेता दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते हैं, वे उनके आदर्शों से कैसे भटक सकते हैं।

उनका कहना था कि जो लोग वास्तव में जयललिता के विचारों के प्रति समर्पित हैं, उन्हें पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

दिनाकरन ने अभिनेता से नेता बने विजय पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राजनीति में विश्वास तब बनता है जब नेता जनता के बीच जाकर उनसे सीधे जुड़ते हैं, न कि केवल बयानों से।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के बारे में बात करते हुए उन्हें जयललिता का सच्चा वॉलंटियर बताया और विश्वास व्यक्त किया कि पन्नीरसेल्वम गठबंधन में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अगर अंदरूनी 'धर्म युद्ध' नहीं हुआ होता तो पन्नीरसेल्वम वी.के. शशिकला के नेतृत्व में फिर से मुख्यमंत्री बन सकते थे।

2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बारे में दिनाकरन ने कहा कि यह राज्य के लिए एक 'सच्ची सुबह' होगी। उनका दावा है कि जो स्थान कभी जयललिता के पास था, वह अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी तमिलनाडु को अपनाएंगे और इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक बनाएंगे।

उन्होंने पुष्टि की कि एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में उनकी पार्टी बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से एनडीए में शामिल हुई। उन्होंने डीएमके पर आरोप लगाया कि यह पार्टी भ्रष्टाचार, ड्रग्स तस्करी और कानून-व्यवस्था के टूटने के लिए जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि जयललिता द्वारा शुरू की गई कई कल्याणकारी योजनाएं, जैसे मंगलसूत्र के लिए मुफ्त सोना और छात्रों के लिए लैपटॉप, बंद कर दी गई हैं।

तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के एक नेता के इस आरोप पर कि उन्हें गठबंधन में शामिल होने के लिए ब्लैकमेल किया गया था, दिनाकरन ने कहा कि वह ऐसे दावों से दुखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पैसे या प्रतीकों से जुड़े आरोप गलत हैं और उन्होंने कभी रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार में हिस्सा नहीं लिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि दिनाकरन का यह निर्णय उनकी पार्टी की रणनीति को दर्शाता है। चुनाव में उनकी भूमिका न होने के बावजूद, उनका ध्यान पार्टी की मजबूती और उम्मीदवारों की जीत पर केंद्रित है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिनाकरन ने चुनाव लड़ने से क्यों इनकार किया?
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना और उनके सहयोगियों की जीत सुनिश्चित करना है।
दिवंगत जयललिता की विरासत पर दिनाकरन का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि जो नेता जयललिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करते हैं, उन्हें अपने आदर्शों से नहीं भटकना चाहिए।
दिनाकरन ने विजय पर क्या कटाक्ष किया?
उन्होंने कहा कि राजनीति में विश्वास तब बनता है जब नेता जनता के बीच जाएं, न कि केवल बयानों से।
राष्ट्र प्रेस
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