दिलीप घोष का अभिषेक बनर्जी के 'जुमला' आरोप पर जोरदार जवाब, भाजपा की योजनाएं गरीबों के लिए हैं
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने गरीबों के लिए योजनाएं बनाई हैं।
- अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के वादों को 'जुमला' कहा।
- दिलीप घोष का कहना है कि हर सरकार गरीबों की मदद करती है।
- टीएमसी सिर्फ चुनाव के समय घोषणाएं करती है।
- हुमायूं कबीर का मुद्दा चुनावी लाभ के लिए था।
खड़गपुर, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा पार्टी के संकल्प-पत्र पर उठाए गए सवालों का जवाब दिया है। दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि भाजपा ने अपने 'संकल्प-पत्र' में घोषणाएं गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए की हैं।
भाजपा के 'संकल्प पत्र' में महिलाओं और बेरोजगारों को 3000 रुपए मासिक भत्ता देने के वादे को अभिषेक बनर्जी ने एक नया 'जुमला' कहा था। इस पर दिलीप घोष ने कहा, "हर सरकार गरीबों की मदद करने के लिए कुछ न कुछ करती है। चुनाव के समय उनके भत्ते में कुछ रुपए बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन उनकी जरूरत है कि उन्हें इतना मासिक भत्ता मिले कि उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके। भाजपा ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय लिया है।"
उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार पूरे देश का संचालन कर रही है। 81 करोड़ लोगों को राशन प्रदान किया जा रहा है। आवास, गैस और शौचालय जैसी सभी योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल रहा है।"
दिलीप घोष ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस केवल वोटों के लिए घोषणाएं करती है। उन्हें महिलाओं की याद चुनाव के समय ही आती है।
इस अवसर पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हुमायूं कबीर और बाबरी मस्जिद के संबंध में दिए गए बयान पर उन्होंने कहा, "केंद्रीय गृह मंत्री ने हुमायूं कबीर मामले को स्पष्ट रूप से समझा दिया है।"
उन्होंने कहा, "बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दे केवल लोगों को रिझाने का एक तरीका थे। हुमायूं कबीर का उद्देश्य इस मुद्दे को उठाकर अपना नाम कमाना और ममता बनर्जी के साथ सौदेबाजी करना था। अब यह मुद्दा चुनाव में चर्चा के लिए नहीं रहेगा।"
जानकारी के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में 'बाबरी मस्जिद' का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों से पहले 'बाबरी' नाम से मस्जिद की नींव रखी। इस कदम के कारण विधायक हुमायूं कबीर को टीएमसी ने पार्टी से अलग किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पार्टी बनाई, जो विधानसभा चुनाव में भाग ले रही है।