क्या दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में आशा वर्कर्स के उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- दिलीप घोष ने आशा वर्कर्स के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
- सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
- आशा वर्कर्स का आंदोलन तेजी पकड़ रहा है।
- प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की प्रशंसा की गई।
- राजनीति को खेल से अलग रखा जाना चाहिए।
पश्चिम मेदिनीपुर, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में आशा वर्कर्स के उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में देरी कर रही है, जिससे वह अपने लिए एक संकट खड़ा कर रही है।
आशा वर्कर्स ने भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन किया है। हाल ही में कोलकाता में बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स ने प्रदर्शन किया। इस पर दिलीप घोष ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "आशा वर्कर्स के खिलाफ उत्पीड़न और शोषण की जो घटनाएं हो रही हैं, वह अत्यंत अनैतिक और निंदनीय हैं।"
दिलीप घोष ने यह भी सवाल किया कि जब हर विभाग के कर्मचारी असंतुष्ट हैं, तो सरकार विकास कैसे कर सकेगी? उन्होंने आशा वर्कर्स की मांगों को मानने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसी बीच, दिलीप घोष ने विधायक अब्दुर रहीम बख्शी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "हर कोई केवल सुर्खियों में आने के लिए बड़े बयान दे रहा है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि जिनके पास सही दस्तावेज हैं, उनके नाम लिस्ट में जरूर हों। लेकिन बांग्लादेश से लाए गए किसी भी व्यक्ति का नाम लिस्ट में नहीं रहेगा।"
पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए दिलीप घोष ने कहा, "ईडी जिस तरह से काम कर रहा है, उससे लोग खुश हैं। हमें सभी भ्रष्ट लोगों को जेल भेजने की आवश्यकता है।"
आईसीसी वर्ल्ड कप में बांग्लादेश टीम को लेकर विवाद पर दिलीप घोष ने कहा, "पाकिस्तान क्रिकेट में राजनीति लाया और अब बांग्लादेश भी उसी रास्ते पर चल रहा है। लेकिन इसका नुकसान केवल उनके देश को होगा।"
उन्होंने कहा कि राजनीति को एक तरफ रखा जाना चाहिए और बांग्लादेश को अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। खेल को खेल की भावना से खेला जाना चाहिए, तभी भारत के लोग उन्हें समर्थन देंगे।