क्या 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान ने 11 वर्षों में भारत की बेटियों को नया आयाम दिया?

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क्या 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान ने 11 वर्षों में भारत की बेटियों को नया आयाम दिया?

सारांश

क्या आपको पता है कि भारत में लड़कियों के लिए 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान ने 11 सालों में कितना बदलाव लाया है? आइए जानते हैं इस अभियान की उपलब्धियों और बेटियों के नए रिकॉर्ड के बारे में।

मुख्य बातें

'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान ने 11 साल पूरे किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लड़कियों के नए रिकॉर्ड बनाने का जिक्र किया।
इस अभियान ने लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा पर जोर दिया है।
लिंगानुपात में सुधार हुआ है, जो समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
यह योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार का 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान आज 11 साल पूरे कर चुका है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारतीय बेटियां आज हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भारत में कन्या को लक्ष्मी माना जाता है और आज ही के दिन 11 साल पहले 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान का आरंभ हुआ था। यह गर्व का विषय है कि आज बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।"

पीएम मोदी ने एक सुभाषित साझा करते हुए लिखा, "दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्। यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया॥"

यह उल्लेखनीय है कि 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई। इसका मुख्य उद्देश्य लड़कियों के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करना, और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है और इसे देश के सभी जिलों में लागू किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस अभियान ने राष्ट्रीय चेतना में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। इसने समुदायों, सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और मीडिया को लड़कियों के अधिकारों के लिए एक न्यायपूर्ण वातावरण बनाने के लिए संगठित किया है।

इस पहल ने जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार, बालिका शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 'एचआईएमआईएस' के आंकड़ों के अनुसार, देश में जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 में 918 था, जो 2024-25 में बढ़कर 929 तक पहुंच गया है। वहीं, शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान ने भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का कार्य किया है। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा को बढ़ावा देता है, बल्कि यह समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करता है। सरकार और समुदायों का सहयोग इस दिशा में महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का उद्देश्य लड़कियों की सुरक्षा, शिक्षा और उनकी स्थिति में सुधार करना है।
इस अभियान की शुरुआत कब हुई थी?
इस अभियान की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हुई थी।
क्या इस अभियान ने लिंगानुपात में सुधार किया है?
हां, इस अभियान ने जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार किया है।
बालिकाओं का नामांकन अनुपात कैसे बढ़ा है?
माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन अनुपात 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
क्या यह अभियान सभी जिलों में लागू है?
जी हां, यह अभियान भारत के सभी जिलों में लागू है।
राष्ट्र प्रेस
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