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डीआरडीओ का ऐतिहासिक कदम: उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण, 90% स्वदेशी बनाने की योजना

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डीआरडीओ का ऐतिहासिक कदम: उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण, 90% स्वदेशी बनाने की योजना

सारांश

डीआरडीओ ने 25 अप्रैल को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में ट्रैक और पहिएदार उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किया। 30 मिमी क्रूलेस टरेट, ATGM क्षमता और 65% स्वदेशी सामग्री से लैस ये प्लेटफॉर्म टाटा और भारत फोर्ज ने बनाए हैं। स्वदेशीकरण 90% तक बढ़ाने की योजना है।

मुख्य बातें

25 अप्रैल 2025 को अहिल्यानगर, महाराष्ट्र में डीआरडीओ ने ट्रैक और पहिएदार उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किया।
अनावरण डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ.
कामत ने किया; डिजाइन VRDE ने तैयार किया।
दोनों प्लेटफॉर्म 30 मिमी क्रूलेस टरेट और 7.62 मिमी पीकेटी गन से लैस हैं तथा ATGM दागने में सक्षम हैं।
वर्तमान में 65% स्वदेशी सामग्री है, जिसे 90% तक बढ़ाने की योजना है।
निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड ने MSMEs के सहयोग से किया।
प्लेटफॉर्म में STANAG स्तर 4 और 5 सुरक्षा और उभयचर क्षमता (हाइड्रो जेट्स) शामिल है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की रक्षा तकनीक में एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने 25 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित अपनी प्रयोगशाला में दो उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म — ट्रैक आधारित और पहिएदार — का औपचारिक अनावरण किया। इन प्लेटफॉर्मों को वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE) ने डिजाइन और विकसित किया है। अनावरण रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने किया।

क्या है इन बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों की खासियत?

दोनों प्लेटफॉर्म स्वदेशी रूप से निर्मित 30 मिमी क्रूलेस टरेट से लैस हैं। इनमें उच्च शक्ति इंजन और स्वचालित ट्रांसमिशन का उपयोग किया गया है, जो इन्हें तीव्र गति, ढलान पार करने और बाधाओं से निपटने में सक्षम बनाता है।

इन प्लेटफॉर्मों में मॉड्यूलर विस्फोट और बैलिस्टिक सुरक्षा के साथ STANAG स्तर 4 और 5 की सुरक्षा क्षमता शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक उभयचर मॉडल भी तैयार किया गया है जिसमें हाइड्रो जेट्स लगाकर जलीय बाधाओं को पार करने की विशेष क्षमता दी गई है।

30 मिमी क्रूलेस बुर्ज और 7.62 मिमी पीकेटी गन को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों (ATGM) को लॉन्च करने के लिए भी कॉन्फिगर किया गया है, जिससे यह मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म बन जाता है।

स्वदेशीकरण की राह: 65 से 90 प्रतिशत का लक्ष्य

वर्तमान में इन प्लेटफॉर्मों में 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। डीआरडीओ ने इसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। यह कदम भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के अनुरूप है।

यह उल्लेखनीय है कि भारत अभी भी रक्षा उपकरणों के मामले में दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म का विकास न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

उद्योग जगत की भागीदारी

इन प्लेटफॉर्मों का निर्माण दो प्रमुख उद्योग साझेदारों — टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और भारत फोर्ज लिमिटेड (BFL) — ने कई लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सहयोग से किया है। इससे रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग और सरकारी संस्थाओं के बीच सहयोग का एक नया मॉडल उभरा है।

इस कार्यक्रम में आयुध एवं युद्ध अभियांत्रिकी प्रणाली (ACE) के विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक, TASL पुणे के CEO एवं MD, BFL पुणे के उपाध्यक्ष एवं संयुक्त MD सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं का संयुक्त प्रयास

इस परियोजना में वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, आयुध अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, युद्ध वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान और अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर) सहित कई डीआरडीओ प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया।

यह सहयोग दर्शाता है कि भारत अब रक्षा तकनीक में केवल आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि एकीकृत स्वदेशी तंत्र खड़ा कर रहा है।

रणनीतिक महत्व और आगे की राह

भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए ये बख्तरबंद प्लेटफॉर्म सेना की उभरती परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं। STANAG स्तर 5 सुरक्षा और ATGM क्षमता इन्हें आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए उपयुक्त बनाती है।

आने वाले समय में इन प्लेटफॉर्मों के व्यापक परीक्षण, सेना में शामिल करने की प्रक्रिया और स्वदेशी सामग्री को 90% तक बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में 65% स्वदेशी सामग्री एक बड़ी शुरुआत है, लेकिन 90% का लक्ष्य असली परीक्षा होगी। टाटा और भारत फोर्ज जैसी निजी कंपनियों की भागीदारी से स्पष्ट है कि सरकार अब रक्षा उत्पादन को सार्वजनिक एकाधिकार से बाहर निकाल रही है — यह सकारात्मक बदलाव है, बशर्ते गुणवत्ता और समयसीमा पर कोई समझौता न हो।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरडीओ ने कौन से नए बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं?
डीआरडीओ ने 25 अप्रैल 2025 को अहिल्यानगर में ट्रैक आधारित और पहिएदार उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म लॉन्च किए। दोनों 30 मिमी क्रूलेस टरेट और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल क्षमता से लैस हैं।
इन बख्तरबंद प्लेटफॉर्मों में कितनी स्वदेशी सामग्री है?
वर्तमान में इन प्लेटफॉर्मों में 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। डीआरडीओ की योजना इसे भविष्य में 90 प्रतिशत तक बढ़ाने की है।
इन प्लेटफॉर्मों को किस कंपनी ने बनाया है?
इन प्लेटफॉर्मों का निर्माण टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड ने कई MSMEs के सहयोग से किया है। डिजाइन वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE) ने किया।
डीआरडीओ के इन प्लेटफॉर्मों की सुरक्षा क्षमता क्या है?
इन प्लेटफॉर्मों में STANAG स्तर 4 और 5 की बैलिस्टिक और विस्फोट सुरक्षा है। उभयचर मॉडल में हाइड्रो जेट्स के जरिए जलीय बाधाएं पार करने की विशेष क्षमता भी है।
डीआरडीओ के बख्तरबंद प्लेटफॉर्म का अनावरण किसने किया?
अनावरण रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने 25 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में किया।
राष्ट्र प्रेस
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