क्या रक्षा मंत्रालय ने आईआईटी समेत 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से वार्ता की?
सारांश
Key Takeaways
- रक्षा मंत्रालय और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
- लॉन्ग-टर्म रिसर्च की दिशा में कदम उठाना।
- छात्रों को रक्षा तकनीक में शामिल करना।
- नई तकनीकों पर साझा प्रयास करना।
- आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक विकसित करना।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने मंगलवार को आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के डायरेक्टर और डीन के साथ एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की। इस चर्चा में डिफेंस पीएसयू और अन्य संबंधित पक्ष भी शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में हो रहे रिसर्च को रक्षा उत्पादन की आवश्यकताओं से जोड़ना था। इसके साथ ही एक ऐसा तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया, जो लंबे समय तक सहयोग सुनिश्चित कर सके।
इस दौरान जिन विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया, उनमें छात्रों को इस प्रक्रिया में शामिल कर लॉन्ग-टर्म रिसर्च को प्रोत्साहित करना, शैक्षणिक संस्थानों और डिफेंस पीएसयू के बीच सहयोग को केवल छोटे प्रोजेक्टों तक सीमित न रखना और भविष्य की नई तकनीकों पर मिलकर काम करने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना शामिल था।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कॉलेजों में होने वाला रिसर्च सीधे उपयोगी रक्षा तकनीक में परिवर्तित हो सकेगा। संजीव कुमार ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसी बातचीत से मंत्रालय को शैक्षणिक संस्थानों की क्षमताओं को बेहतर समझने में सहायता मिलती है।
उन्होंने शिक्षा क्षेत्र से अनुरोध किया कि वे रक्षा उत्पादन विभाग के साथ मिलकर देश की ताकत को बढ़ाने के लिए लंबे समय तक काम करें।
उल्लेखनीय है कि इस बैठक में आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी तिरुपति, आईआईटी गुवाहाटी सहित देश के 24 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हुए। इस बातचीत के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि रक्षा मंत्रालय देश की शीर्ष शिक्षण संस्थाओं और उद्योगों के साथ मिलकर आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तकनीक विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।