क्या ईपीएस का आरोप सही है? 2021 से डीएमके सरकार में 4 लाख करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार?

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क्या ईपीएस का आरोप सही है? 2021 से डीएमके सरकार में 4 लाख करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार?

सारांश

क्या डीएमके सरकार ने भ्रष्टाचार की नदियों को बहने दिया? एआईएडीएमके नेता ईपीएस के आरोपों के पीछे के तथ्य जानें। उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन देकर 2021 से अब तक के 4 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है। क्या इन आरोपों में सच्चाई है? जानिए इस पर क्या हुआ।

Key Takeaways

  • ईपीएस ने डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • 4 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई है।
  • राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया है।
  • विपक्ष ने पिछले चार वर्षों में भ्रष्टाचार के पैटर्न की बात की है।
  • डीएमके ने आरोपों को खारिज किया है।

चेन्नई, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के विपक्ष के नेता और एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने मंगलवार को आरोप लगाया कि 2021 में डीएमके के सत्ता में आने के बाद से राज्य में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने इन आरोपों की गहन जांच की मांग करते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

पलानीस्वामी ने चेन्नई के गिंडी स्थित राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की, जहां उन्होंने एक डोजियर प्रस्तुत किया। इस डोजियर में डीएमके सरकार के कार्यकाल के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों में कथित भ्रष्टाचार के मामलों का विभागवार विवरण शामिल है। ईपीएस के अनुसार, इन आरोपों के समर्थन में “पर्याप्त और सत्यापन योग्य सबूत” भी प्रदान किए गए हैं।

इस दौरान उनके साथ कई वरिष्ठ एआईएडीएमके नेता मौजूद थे, जिनमें पूर्व मंत्री के. पी. मुनुसामी, नाथम विश्वनाथन, थंगामणि, एस. पी. वेलुमणि, डी. जयकुमार और सी. वी. शण्मुगम शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अपील की कि वह कथित घोटालों की गहन जांच शुरू कराने या उसकी सिफारिश करें। उनका कहना था कि बीते चार वर्षों में राज्य में प्रणालीगत भ्रष्टाचार का एक पैटर्न देखने को मिला है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में पलानीस्वामी ने डीएमके सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने जनता के लिए कोई ठोस काम नहीं किया और भ्रष्टाचार ही उसकी पहचान बन गया है।

उन्होंने कहा कि कई विभागों में भ्रष्टाचार व्याप्त है और कथित वित्तीय अनियमितताओं का स्तर इतना बड़ा है कि तत्काल और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ईपीएस ने यह भी दोहराया कि एआईएडीएमके ने सबूतों के साथ पूरी सूची सौंपी है, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही के हित में विस्तृत जांच जरूरी है।

पलानीस्वामी ने पोंगल उपहार योजना का मुद्दा भी उठाया और सरकार से सवाल किया कि इस बार पोंगल गिफ्ट हैम्पर के साथ 5,000 रुपये नकद क्यों नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि जब डीएमके सरकार बार-बार अपनी कल्याणकारी प्रतिबद्धताओं का दावा करती रही है, तो त्योहारों के मौके पर जनता की उम्मीदों पर वह क्यों खरी नहीं उतरी।

वहीं, डीएमके सरकार इससे पहले भी विपक्ष के ऐसे आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि उसका प्रशासन सामाजिक न्याय, विकास और कल्याणकारी नीतियों पर केंद्रित है।

हालांकि, पलानीस्वामी ने स्पष्ट किया कि एआईएडीएमके जवाबदेही की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेगी और उचित जांच सुनिश्चित होने तक सभी संवैधानिक मंचों का रुख करती रहेगी। राज्यपाल की ओर से फिलहाल ज्ञापन पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Point of View

पलानीस्वामी का आरोप एक गंभीर चिंता का विषय है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। राज्य की जनता को यह जानने का हक है कि उनकी सरकार उनके लिए क्या कर रही है। यह समय है कि सभी राजनीतिक पार्टियां जवाबदेही के लिए आगे आएं।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

ईपीएस ने किस पर आरोप लगाया है?
ईपीएस ने डीएमके सरकार पर 2021 से अब तक 4 लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
पलानीस्वामी ने किससे ज्ञापन सौंपा?
पलानीस्वामी ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
क्या डीएमके सरकार ने आरोपों का खंडन किया है?
हाँ, डीएमके सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उनका प्रशासन सामाजिक न्याय और विकास पर केंद्रित है।
क्या एआईएडीएमके जांच की मांग कर रही है?
हाँ, एआईएडीएमके ने आरोपों की विस्तृत जांच की मांग की है।
पोंगल उपहार योजना पर क्या सवाल उठाए गए हैं?
पलानीस्वामी ने पोंगल उपहार योजना में 5,000 रुपये नकद ना देने पर सवाल उठाए हैं।
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