क्या देशभर में फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले की छानबीन चल रही है?
सारांश
Key Takeaways
- घोटाले में 40 से अधिक सरकारी संस्थाएँ शामिल हैं।
- फर्जी ईमेल और जॉइनिंग लेटर का इस्तेमाल किया गया।
- ईडी ने 15 स्थानों पर छापेमारी की है।
- जांच में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
पटना, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पटना के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक विशाल नकली सरकारी नौकरी के घोटाले की जांच आरंभ कर दी है। यह घोटाला एक संगठित गिरोह द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो लोगों को फर्जी सरकारी नौकरियों का प्रलोभन देकर ठग रहा था।
प्रारंभ में यह मामला भारतीय रेलवे के नाम पर उजागर हुआ, लेकिन जांच से यह स्पष्ट हुआ कि यह गिरोह केवल रेलवे तक सीमित नहीं था। इसमें 40 से अधिक अन्य सरकारी संस्थाएँ और विभाग भी शामिल थे, जैसे कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, आरआरबी, भारतीय डाक, इनकम टैक्स, हाई कोर्ट, पीडब्ल्यूडी, बिहार सरकार, डीडीए, राजस्थान सचिवालय और अन्य कई विभाग।
जानकारी के अनुसार, इस गिरोह ने फर्जी ईमेल अकाउंट बनाकर सरकारी डोमेन की नकल की और लोगों को झूठे जॉइनिंग लेटर भेजे। इसके अलावा, भरोसा जीतने के लिए उन्होंने कुछ लोगों को 2-3 महीने का प्रारंभिक वेतन भी प्रदान किया। इन लोगों को रेलवे में आरपीएफ, टीटीई, टेक्नीशियन जैसी भूमिकाओं में रखा गया, ताकि सब कुछ सही दिखे।
जांच के तहत, ईडी इस समय पूरे देश में 15 स्थानों पर छापेमारी कर रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर में 1 और मोतिहारी में 2 स्थानों पर तलाशी चल रही है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 2 स्थानों पर भी जांच हो रही है। केरल में एर्नाकुलम, पांडलम, अडूर और कोडुर में 1-1 स्थान पर छापेमारी जारी है। तमिलनाडु के चेन्नई, गुजरात के राजकोट और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 2, इलाहाबाद (प्रयागराज) में 1 और लखनऊ में 1 स्थान पर तलाशी ली जा रही है।
ईडी का कहना है कि यह एक बड़ा और संगठित गिरोह है, इसलिए जांच कई राज्यों और विभागों में फैली हुई है। फिलहाल यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह गिरोह कहाँ तक फैला हुआ है, कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं और कितने लोग इस धोखाधड़ी के शिकार बन चुके हैं। आगे की जांच में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।