क्या ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र और ग्रुप कैप्टन प्रशांत को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया?
सारांश
Key Takeaways
- ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
- उन्होंने अंतरिक्ष में खेती की और रिसर्च की।
- ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
- दोनों अधिकारियों ने साहस और नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण पेश किया।
- इनकी उपलब्धियाँ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
७७वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान के लिए सशस्त्र बलों के ७० कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जा रहे हैं। इन वीरता पुरस्कारों में १ अशोक चक्र, ३ कीर्ति चक्र, १३ शौर्य चक्र (१ मरणोपरांत), १ बार टू सेना मेडल (वीरता), ४४ सेना मेडल (वीरता) (५ मरणोपरांत), ६ नौसेना मेडल (वीरता) और २ वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिलने वाला ‘अशोक चक्र’ देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। इसके लिए उन्होंने बीते साल २०२५ में उड़ान भरी थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद शुभांशु शुक्ला दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं, जो स्पेस में गए थे। यह सम्मान मिशन के दौरान दिखाए गए असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मिला है।
इस यात्रा के दौरान शुभांशु शुक्ला ने कई रिसर्च की थीं, जिनमें अंतरिक्ष में खेती भी शामिल थी। उन्होंने स्पेस में मेथी और मूंग की खेती की थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी। यह बताएगी कि चाहे राह कितनी भी कठिन क्यों न हो, यदि हृदय में श्रद्धा हो और कर्म में शक्ति हो तो आकाश भी हमारी सीमा नहीं रह जाता।
उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिशन की सफलता सुनिश्चित की। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व और शांतचित्त निर्णय लेने की क्षमता को इस सर्वोच्च सम्मान के माध्यम से मान्यता मिली है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
वहीं, कीर्ति चक्र से सम्मानित भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर एक प्रतिष्ठित फाइटर टेस्ट पायलट हैं। उन्हें भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक के रूप में चुना गया है। वायुसेना के पायलट के तौर पर उनके पास ३००० से अधिक घंटे की उड़ान का अनुभव है। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्सिओम-4 मिशन के बैकअप सदस्य भी थे। प्रशांत २०१९ से इसरो के गगनयान कार्यक्रम के साथ मिलकर प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' प्राप्त कर चुके हैं। उन्हें १९ दिसंबर, १९९८ को वायुसेना में कमीशन मिला था।
नौसेना लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. एवं लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. को शौर्य चक्र से सम्मानित करने का फैसला लिया गया है। नौसेना की इन युवा महिला अधिकारियों ने आईएनएसवी तरिणी पर सवार होकर नविका सागर परिक्रमा सफलतापूर्वक पूर्ण किया था। इसके लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। यह नौसैनिक अभियान २ अक्टूबर २०२४ से २९ मई २०२५ के बीच पूरा किया गया, जिसमें दोनों अधिकारियों ने द्वि-हस्त संचालित (डुअल-हैंडेड) नौकायन द्वारा विश्व की परिक्रमा कर एक ऐतिहासिक और अग्रणी उपलब्धि हासिल की है।