क्या गणतंत्र दिवस परेड में सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया?
सारांश
Key Takeaways
- बैटल एरे फॉर्मेट ने युद्ध की रणनीति को दर्शाया।
- भारतीय सेना ने स्वदेशी तकनीक का प्रभावी प्रदर्शन किया।
- नई पीढ़ी के मानवरहित हथियार शामिल हुए।
- दुश्मनों की निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग।
- गणतंत्र दिवस परेड में प्रदर्शन ने सुरक्षा बलों की क्षमता को उजागर किया।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय सेना ने पहली बार ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया। ‘बैटल एरे’ का अर्थ है रणभूमि की व्यूह रचना। इस प्रदर्शन के माध्यम से दर्शाया गया कि युद्ध के समय सेना कैसे आगे बढ़ती है, हमले की रणनीति क्या होती है, और दुश्मन को कैसे जवाब दिया जाता है।
कर्तव्य पथ पर इस प्रदर्शन के दौरान ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक भी दिखाई गई। यह संपूर्ण प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को एक गर्व भरा सलाम भी था। सेना के विशेष टैब्लो ने एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर का चित्रण किया, जहां से संपूर्ण युद्ध की योजना बनाई जाती है। इसमें यह भी दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम में टारगेट निर्धारित होते हैं, हमले की योजना बनाई जाती है और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसे वायु रक्षा प्रणाली से देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। इसके साथ ही हवाई घटक भी शामिल रहे।
रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी के सैनिक एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में शामिल थे। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल था, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता के तौर पर स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र भी शामिल था। यह युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करता है। इसके बाद युद्ध में अग्रणी भूमिका निभाने वाले टैंक आए, जिनमें टी-90 भीष्म और मेन बैटल टैंक अर्जुन शामिल थे। इन्हें अपाचे एएच-64 ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से हवाई सहायता प्राप्त हुई।
अन्य मैकेनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-2 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल और नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल थे। अब तक परेड में सैन्य मार्चिंग टुकड़ियां और हथियार अलग-अलग दिखाई देते थे, लेकिन इस बार युद्ध के वास्तविक क्रम के अनुसार तैयारी देखने को मिली। इसमें दुश्मन पर नज़र रखने वाले सिस्टम, टैंक, पैदल सेना, तोपखाना, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और अंत में सप्लाई एवं सुरक्षा व्यवस्था शामिल थी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना कितनी सक्षम, मजबूत और फुर्तीली है। यहां सेना ने हाई-टेक और स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन किया। इसके बाद विशेष बलों की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ी, जिसमें अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और धवंशक लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे।
इसके बाद वाहनों पर लगे रोबोटिक डॉग, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और चार ऑटोनॉमस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (निग्रह, भैरव, भुविरक्षा और कृष्णा) नजर आए। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल थे, जिन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। ये अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हैं और एक साथ झुंड में ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जोल्ट का उपयोग करके एडवांस्ड सर्विलांस दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल तोपखाने की फायरिंग को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।
इस बैटल एरे में यह भी प्रदर्शित किया गया कि आज की भारतीय सेना केवल बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। युद्ध अब डेटा, ड्रोन और तकनीक से लड़ा जाता है। सेना ने प्रदर्शित किया कि कैसे वे दूर बैठकर भी दुश्मन पर नजर रखती है, सही समय पर निर्णय लेती है और फिर सटीक हमला करती है। यह सब पूरी तरह से स्वदेशी हथियारों और सिस्टम के माध्यम से किया जाता है। इस बार की परेड में कई नए यूनिट और हथियार पहली बार देखने को मिले, जैसे कि पहली बार भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी शामिल हुए। 155 मिमी एटीएजीएस तोप, लंबी दूरी तक मार करने वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग, बिना चालक वाले वाहन और लुटेरिंग म्यूनिशन भी पहली बार देशवासियों के सामने आए।