क्या गणतंत्र दिवस: पूर्ण स्वराज से संविधान लागू होने तक भारत के गणराज्य बनने की कहानी, बाबासाहेब को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की यह थी वजह?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या गणतंत्र दिवस: पूर्ण स्वराज से संविधान लागू होने तक भारत के गणराज्य बनने की कहानी, बाबासाहेब को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की यह थी वजह?

सारांश

गणतंत्र दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो भारतीय संविधान के लागू होने की कहानी को दर्शाता है। यह दिन, स्वतंत्रता संग्राम और संविधान सभा के गठन का प्रतीक है। जानें, कैसे भारतीय गणराज्य की नींव रखी गई और बाबासाहेब अंबेडकर की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी।

मुख्य बातें

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है।
बाबासाहेब अंबेडकर ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह दिन स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है।
संविधान लागू करने से भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण और परेड होते हैं।

नई दिल्ली, 25 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 1947 में हिंदुस्तान को ब्रिटिश शासन से आजादी मिल गई थी, लेकिन कानून अभी भी अंग्रेजों के बनाए हुए थे। भारत के पास अपनी सरकार थी, लेकिन संविधान का अभाव महसूस किया जा रहा था। इस कमी को दूर करने के लिए 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया।

आखिरकार, आजादी के तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, जिसमें महान विचारों का समावेश किया गया। भारत सरकार के समाज कल्याण विभाग के अनुसार, यह दिन जानबूझकर चुना गया था क्योंकि यह 1930 के 'पूर्ण स्वराज' के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। इस दिन, भारत ने संविधान लागू करके स्वतंत्रता आंदोलन के राजनीतिक संघर्ष को एक नई दिशा दी।

राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, 1929 में पूर्ण स्वराज की मांग औपचारिक राजनीतिक लक्ष्य बन गई। 26 जनवरी 1930 को भारतीयों ने पूरे देश में पूर्ण स्वराज दिवस मनाया, जिससे उन्होंने ब्रिटिश शासन के अधीन उपनिवेश के दर्जे को खारिज किया।

यह स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जो औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत संवैधानिक सुधारों की मांग को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा ने अपनी पहली बैठक की, जिससे संविधान के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई।

संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद और ड्राफ्टिंग सभा के अध्यक्ष बाबासाहेब अंबेडकर नियुक्त किए गए। सलमान खुर्शीद ने कहा था, "अगर बाबासाहेब अंबेडकर संविधान सभा में रहेंगे, तो इस संविधान पर कभी कोई सवाल नहीं उठेगा।"

संविधान तैयार करने की प्रक्रिया 2 साल, 11 महीने और 17 दिनों तक चली, और 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया। संविधान सभा ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 165 दिनों में 11 सत्र आयोजित किए।

जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ, तो भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। 1976 में 'समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़े गए, जिससे भारत 'संप्रभु, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष' लोकतांत्रिक गणराज्य बना।

हर साल गणतंत्र दिवस एक साझा राष्ट्रीय गौरव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन ध्वजारोहण, परेड, और सामूहिक उत्सव होते हैं, जो इस दिन के महत्व को उजागर करते हैं।

नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड देश की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य शक्ति की एक झलक प्रस्तुत करती है। दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के साथ होती है।

जब भारत के राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर आते हैं, तो कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत होती है, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराना, राष्ट्रगान गाना और 21 तोपों की सलामी शामिल होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे संविधान और स्वतंत्रता संग्राम की गहरी जड़ों को दर्शाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमने कितनी मेहनत और संघर्ष के बाद अपना संविधान प्राप्त किया। देश के सभी नागरिकों को इस दिन की महत्ता को समझना चाहिए और इसे गर्व के साथ मनाना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान के लागू होने की खुशी में मनाया जाता है।
बाबासाहेब अंबेडकर का योगदान क्या था?
बाबासाहेब अंबेडकर ने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें संविधान सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
पूर्ण स्वराज दिवस कब मनाया गया?
पूर्ण स्वराज दिवस 26 जनवरी 1930 को मनाया गया था।
गणतंत्र दिवस पर क्या आयोजन होते हैं?
गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण, परेड, और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और संविधान की महत्ता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस