क्या गणतंत्र दिवस परेड में वैश्विक बौद्ध एकता की झलक देखने को मिली?
सारांश
Key Takeaways
- गणतंत्र दिवस पर भारत ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया।
- 40 से अधिक देशों के बौद्ध भिक्षु शामिल हुए।
- भारत की आध्यात्मिक विरासत का संदेश दिया गया।
- गणतंत्र दिवस समारोह में वैश्विक एकता का अनुभव हुआ।
- कर्तव्य पथ पर बुद्ध और अशोक स्तंभ के दृश्य ने सबको आकर्षित किया।
नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत ने न केवल सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक वैभव का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक आत्मा और आध्यात्मिक विरासत का एक सशक्त संदेश पूरे विश्व को दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर 40 से अधिक देशों से आए पूज्य अंतरराष्ट्रीय बौद्ध भिक्षुओं ने गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया, जिससे यह उत्सव और भी खास बन गया।
गणतंत्र दिवस समारोह के साथ-साथ नई दिल्ली में आयोजित दूसरे वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन का समापन भी हुआ। इसी क्रम में भारत सरकार के सम्मानित अतिथि के रूप में विश्व के विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं ने कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड का आनंद लिया। इस दौरान भारत की सैन्य शक्ति, अनुशासन, विविध सांस्कृतिक झांकियां और जीवंत लोकतंत्र की रंगीन झलक ने विदेशी मेहमानों को गहराई से प्रभावित किया।
इस अवसर ने भारत की उस ऐतिहासिक भूमिका को भी उजागर किया, जब उसने शीत युद्ध के दौर में विभाजित दुनिया को एक मंच पर लाने का प्रयास किया था। आज, जब वैश्विक व्यवस्था के ताने-बाने में दरारें नजर आ रही हैं, भारत की शक्ति उसके नागरिकों, लोकतांत्रिक मूल्यों और करुणा तथा समझ के संकल्प में निहित दिखाई देती है। कर्तव्य पथ पर बुद्ध की प्रतिमाओं और अशोक स्तंभ के दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने भारत की बौद्ध विरासत और शांति के संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्फेडरेशन (आईआईबीसी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत की शक्ति उसके लोकतंत्र और आध्यात्मिक गहराई में निहित है। दुनिया भर से आए भिक्षु आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत को आशीर्वाद देने के लिए एकत्र हुए हैं। कर्तव्य पथ पर बुद्ध और अशोक स्तंभ के दृश्य अत्यंत भव्य हैं। इंटरनेशनल बौद्ध कॉन्फेडरेशन की ओर से आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद, नमो बुद्धाय।"