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राजस्थान का रहस्यमयी गौमुख कुंड महादेव मंदिर: शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक

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राजस्थान का रहस्यमयी गौमुख कुंड महादेव मंदिर: शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक

सारांश

चित्तौड़गढ़ का गौमुख कुंड महादेव मंदिर एक अद्वितीय स्थल है जहाँ प्रकृति और आस्था का मिलन होता है। यहाँ शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक होता है, जो इसे रहस्यमयी बनाता है। जानें इस मंदिर की खासियत और यहाँ का अद्भुत अनुभव।

मुख्य बातें

गौमुख कुंड महादेव मंदिर एक अद्वितीय धार्मिक स्थल है।
यहाँ शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक होता है।
जलधारा प्राकृतिक रूप से निकलती है और कभी नहीं रुकती।
मंदिर तक पहुँचने के लिए कठिन रास्ता है, जो अनुभव को और अनोखा बनाता है।
यह स्थान आस्था और प्रकृति का अनूठा मिलन है।

चित्तौड़गढ़, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान की भूमि अपने ऐतिहासिक महत्व, किलों और साहसिक कथाओं के लिए जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही यहाँ की आस्था और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों के लिए भी जानी जाती है। इन विशेष स्थानों में से एक अद्भुत और आकर्षक स्थल है चित्तौड़गढ़ किले में स्थित गौमुख कुंड महादेव मंदिर। यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि एक ऐसा अनुभव प्रदान करता है जहाँ आस्था, प्रकृति और रहस्य एक साथ मिलते हैं।

चित्तौड़गढ़ किला भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक किलों में से एक माना जाता है। इसकी दीवारों में अनेक युद्धों, बलिदानों और शौर्य की कहानियां छिपी हुई हैं। लेकिन इस किले के अंदर एक ऐसा स्थान भी है, जो संपूर्ण रूप से अलग अनुभव प्रदान करता है। जब आप किले के भीतर गहराई में स्थित इस मंदिर की ओर बढ़ते हैं, तो वातावरण धीरे-धीरे परिवर्तित होने लगता है। शोर-शराबा पीछे छूट जाता है और एक शांत, ठंडी और रहस्यमयी हवा आपका स्वागत करती है।

गौमुख कुंड महादेव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां का शिवलिंग है, जिस पर सालभर निरंतर जलाभिषेक होता रहता है। यह जल किसी व्यक्ति द्वारा नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि एक पत्थर की संरचना से निकलता है जिसका आकार गाय के मुख जैसा है। इसीलिए इसे गौमुख कहा जाता है। इस पत्थर के मुख से पानी की एक पतली लेकिन निरंतर बहती धारा सीधे शिवलिंग पर गिरती रहती है।

कहा जाता है कि यह जलधारा कभी रुकती नहीं है। चाहे गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश, यह पानी निरंतर बहता रहता है। इसी कारण लोग इसे केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं मानते, बल्कि इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, कई लोग कहते हैं कि यह जल किसी भूमिगत स्रोत से आता है, लेकिन आज तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह पानी आखिर लगातार आता कहां से है और कैसे बहता रहता है।

मंदिर तक पहुँचने के लिए किले के अंदर कुछ सीढ़ियाँ और संकरी राहें पार करनी पड़ती हैं। यह मार्ग थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, आपको लगता है कि आप किसी और ही दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। ऊपर की दुनिया की भागदौड़ और शोर धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है और एक गहरी शांति आपके चारों ओर फैल जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अनोखा अनुभव भी प्रदान करता है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौमुख कुंड महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर चित्तौड़गढ़ किले में स्थित है।
गौमुख कुंड का नाम क्यों रखा गया?
इसका नाम 'गौमुख' इसलिए है क्योंकि यहाँ से निकलने वाला जल एक पत्थर की संरचना से आता है, जिसका आकार गाय के मुख जैसा है।
क्या यहाँ जलाभिषेक सालभर होता है?
हाँ, यहाँ शिवलिंग पर सालभर निरंतर जलाभिषेक होता है।
क्या यह जलधारा कभी रुकती है?
कहा जाता है कि यह जलधारा कभी नहीं रुकती।
मंदिर तक पहुँचने का रास्ता कैसा है?
मंदिर तक पहुँचने के लिए कुछ सीढ़ियाँ और संकरी राहें पार करनी पड़ती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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