गौतमबुद्धनगर में श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए प्रशासन ने उठाया महत्वपूर्ण कदम
सारांश
Key Takeaways
- गौतमबुद्धनगर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासन सक्रिय है।
- निजी अस्पतालों के साथ मिलकर मेडिकल कैंप आयोजित किए जाएंगे।
- महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य की प्राथमिकता दी जाएगी।
- परिवार के सदस्यों को भी स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल किया जाएगा।
- कंस्ट्रक्शन साइट्स पर नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित होंगे।
गौतमबुद्धनगर, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गौतमबुद्धनगर में श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और अधिक सुलभ बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संदर्भ में, जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सेक्टर-27 के कार्यालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और नोएडा के निजी अस्पतालों के संचालकों के साथ एक विस्तृत बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में श्रमिकों के स्वास्थ्य सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए गए।
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि गौतमबुद्धनगर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी माना जाता है, जहाँ बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं और लाखों श्रमिक यहाँ काम कर रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों के स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसमें आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।
बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने निजी अस्पताल संचालकों से अपील की कि वे अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड का उपयोग करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और लेबर कॉलोनियों में नियमित रूप से मेडिकल कैंप आयोजित करें। उन्होंने विशेष रूप से महिला श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिसमें ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की जांच भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि मेडिकल कैंपों में श्रमिकों के परिवारजनों को भी शामिल किया जाए और नेत्र परीक्षण, चश्मा वितरण तथा मोतियाबिंद जैसी समस्याओं के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने श्रमिक बहुल क्षेत्रों में मिनी ओपीडी और मोबाइल मेडिकल वैन की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिकों को समय पर इलाज मिल सके। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कार्यरत श्रमिकों के लिए भी नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने और मोबाइल चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
जिलाधिकारी ने निजी अस्पतालों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अपना विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार करें और प्रत्येक अस्पताल में एक नोडल अधिकारी नामित करें। इससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय राणा, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन सोनी सहित अन्य चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।