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क्या गीता दत्त की गायकी ने लता मंगेशकर को भी किया था प्रभावित?

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क्या गीता दत्त की गायकी ने लता मंगेशकर को भी किया था प्रभावित?

सारांश

गीता दत्त, एक ऐसी गायिका जिनकी आवाज ने लता मंगेशकर जैसी दिग्गज को भी प्रभावित किया। जानें गीता दत्त की गायकी की कहानी और उनकी जयंती के बारे में।

मुख्य बातें

गीता दत्त की आवाज ने भारतीय संगीत में अमिट छाप छोड़ी।
लता मंगेशकर ने गीता दत्त की गायकी की सराहना की।
गीता दत्त ने अपने करियर में लगभग 1500 गाने गाए।
उनकी जयंती 23 नवंबर को मनाई जाती है।
गीता का परिवार संगीत से भरा हुआ था।

नई दिल्ली, 22 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। अगर संगीत के क्षेत्र में किसी का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किया जाएगा, तो वह स्वर कोकिला लता मंगेशकर का होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लता मंगेशकर भी एक अद्भुत महिला गायिका की आवाज की फैन थीं?

हम यहाँ गीता दत्त की बात कर रहे हैं, जिन्होंने बंगाली और हिंदी सिनेमा में अपनी आवाज से सभी के दिलों में जादू कर दिया। लता मंगेशकर भी गीता दत्त की आवाज की प्रशंसा करती थीं।

23 नवंबर को गीता दत्त का जन्मदिन है। उनका जन्म 23 नवंबर 1930 को पूर्वी बंगाल के फरीदपुर जिले में हुआ था। गाने का शौक उन्हें अपने परिवार से मिला। उनकी मां कविताएं लिखती थीं और पिता मुकुल रॉय संगीतकार थे। गीता की आवाज में ऐसा जादू था कि सुनने वाले उसे कभी नहीं भुला पाते थे।

गीता दत्त ने 1946 में फिल्म 'भक्त प्रह्लाद' में गायकी की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उन्होंने केवल दो पंक्तियाँ गाईं, लेकिन उनकी आवाज को बहुत सराहा गया।

इसके बाद, उन्होंने फिल्म 'दो भाई' में गाने गाए और तेजी से विभिन्न फिल्मों में अपने जादुई सुरों से कई हिट गाने दिए। उनके गाने जैसे 'पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे', 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी', 'चिन चिन चू', 'मुझे जान न कहो मेरी जान', 'ऐ दिल मुझे बता दे', 'वक्त ने किया क्या हसीं सितम', और 'बाबू जी धीरे चलना' बेहद लोकप्रिय हुए। गीता ने अपने करियर में लगभग 1500 गाने गाए।

यतींद्र मिश्र की किताब 'लता सुर गाथा' में लता मंगेशकर और गीता दत्त के बीच एक दिलचस्प किस्सा है। दोनों ने फिल्म 'शहनाई' का गाना 'जवानी की रेल चली जाय रे' गाया और इसी समय उनकी पहली मुलाकात भी हुई थी। लता जी ने जब पहली बार गीता दत्त की आवाज सुनी, तो वे उनके प्रशंसक बन गईं। किताब में यह भी उल्लेख है कि गीता आमतौर पर बंगाली भाषा बोलती थीं, लेकिन माइक पर आते ही उनका उच्चारण एकदम स्पष्ट हो जाता था। लता मंगेशकर भी उनके इस रूप से प्रभावित थीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह समझना जरूरी है कि गीता दत्त का योगदान भारतीय संगीत में कितना महत्वपूर्ण रहा है। उनकी आवाज ने न केवल उनके समकालीनों को प्रभावित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल कायम की।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता दत्त का जन्म कब हुआ था?
गीता दत्त का जन्म 23 नवंबर 1930 को पूर्वी बंगाल के फरीदपुर जिले में हुआ था।
गीता दत्त ने कितने गाने गाए?
गीता दत्त ने अपने करियर में लगभग 1500 गाने गाए।
लता मंगेशकर ने गीता दत्त की आवाज के बारे में क्या कहा?
लता मंगेशकर ने गीता दत्त की आवाज को सुनकर उन्हें अपनी फैन बना लिया था।
गीता दत्त की प्रसिद्ध गाने कौन से हैं?
गीता दत्त के प्रसिद्ध गानों में 'पिया ऐसो जिया में समाय गयो रे', 'जाने कहां मेरा जिगर गया जी', और 'बाबू जी धीरे चलना' शामिल हैं।
गीता दत्त का परिवार में संगीत से क्या संबंध था?
गीता दत्त के पिता मुकुल रॉय एक प्रसिद्ध संगीतकार थे और उनकी मां कविताएं लिखती थीं।
राष्ट्र प्रेस
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