क्या जर्मनी के चांसलर को भारत ने खास तोहफे दिए?

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क्या जर्मनी के चांसलर को भारत ने खास तोहफे दिए?

सारांश

भारत ने जर्मनी के चांसलर को विशेष उपहार देकर सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया। इन उपहारों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों की मजबूती का प्रतीक प्रस्तुत किया गया है। जानें इन उपहारों की खासियत क्या है।

Key Takeaways

  • भारत की कारीगरी का अद्भुत उदाहरण
  • सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करता है
  • भारत-जर्मनी संबंधों को प्रदर्शित करता है
  • स्थायी कलाकृतियाँ जो अर्थ रखती हैं
  • वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करता है

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में यात्रा पर आए जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को भारत की समृद्ध कारीगरी, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शाने वाले विशेष उपहार प्रदान किए गए। ये उपहार न केवल भारत–जर्मनी संबंधों की मजबूती का प्रतीक हैं, बल्कि दोनों देशों के साझा मूल्यों और सहयोग की भावना को भी उजागर करते हैं।

चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को उनके डायमंड डीए62 प्रोपेलर विमान की एक हाथ से बनी पीतल की प्रतिकृति भेंट की गई। यह अद्वितीय प्रतिकृति उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई है, जो धातु शिल्प के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।

सोने की परत से सुसज्जित यह कलाकृति तकनीकी सटीकता और मानवीय कला का सुंदर संगम है। इस विमान से प्रेरित यह प्रतिरूप दूरदर्शी नेतृत्व और जिम्मेदार शासन का प्रतीक माना जा रहा है। इसमें जर्मनी की एयरोनॉटिकल डिजाइन परंपरा और भारत की धातु कारीगरी का अनूठा मेल दिखाई देता है।

इसके अतिरिक्त, चांसलर को उच्च गुणवत्ता वाले चमड़े से बनी एक विशेष कस्टम पायलट लॉगबुक भी भेंट की गई। टिकाऊ और समय के साथ सुंदर रूप लेने वाले चमड़े से तैयार इस लॉगबुक पर हल्की सुनहरी एम्बॉसिंग की गई है।

भारत के कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित यह लॉगबुक पारंपरिक लेदरवर्क को आधुनिक डिजाइन के साथ प्रस्तुत करती है। यह उपहार सटीकता, दूरदर्शिता और निरंतर प्रयास जैसे मूल्यों का प्रतीक है, जो विमानन और नेतृत्व दोनों में समान रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

तीसरे उपहार के रूप में गुजरात के पाटन की प्रसिद्ध पटोला रेशम से बनी दीवार पर सजाई जा सकने वाली रेशमी पतंग भेंट की गई। यह वस्त्र दुर्लभ डबल-इकत तकनीक से बुना गया है, जिसमें दोनों धागों को बुनाई से पहले रंगा जाता है।

इसमें बने ज्यामितीय और पुष्पाकार डिजाइन संतुलन, निरंतरता और सामंजस्य का प्रतीक हैं। पतंग का आकार भारतीय संस्कृति में आकांक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ा माना जाता है, जिसे यहां एक स्थायी और अर्थपूर्ण कलाकृति का रूप दिया गया है।

यह उपहार भारत की पारंपरिक शिल्प विरासत और जर्मनी की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता व प्रक्रिया के सम्मान के बीच एक सूक्ष्म सांस्कृतिक संवाद भी स्थापित करता है।

इन उपहारों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी कारीगरी और सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया, बल्कि भारत-जर्मनी के मजबूत और विकसित होते रणनीतिक संबंधों को भी एक सशक्त संदेश के रूप में दुनिया के सामने रखा।

Point of View

इन उपहारों के माध्यम से भारत ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर और कारीगरी को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारत-जर्मनी संबंधों को और मजबूत बनाता है। हमें गर्व है कि हमारे कुशल कारीगर इस प्रकार की उत्कृष्टता को प्रदर्शित कर रहे हैं।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने चांसलर को कौन से उपहार दिए?
भारत ने चांसलर को पीतल की विमान प्रतिकृति, पायलट लॉगबुक और पटोला रेशमी पतंग भेंट की।
ये उपहार किसकी कारीगरी को दर्शाते हैं?
ये उपहार भारतीय कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
ये उपहार भारत-जर्मनी संबंधों के लिए क्या महत्व रखते हैं?
ये उपहार दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों और साझा मूल्यों का प्रतीक हैं।
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