भारत को वैश्विक निर्माण केंद्र में बदलने के लिए औद्योगिक भूमि सुधार आवश्यक: सीआईआई

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भारत को वैश्विक निर्माण केंद्र में बदलने के लिए औद्योगिक भूमि सुधार आवश्यक: सीआईआई

सारांश

सीआईआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत को वैश्विक निर्माण केंद्र बनाने के लिए औद्योगिक भूमि तक सस्ती पहुँच और सुधार आवश्यक हैं। जानें कैसे यह बदलाव संभव है।

Key Takeaways

  • भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए औद्योगिक भूमि सुधार जरूरी है।
  • सीआईआई ने एक रोडमैप प्रस्तुत किया है जो संरचनात्मक बाधाओं को दूर करता है।
  • एकीकृत राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना की सिफारिश की गई है।

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को एक नई रिपोर्ट में बताया कि भारत को वैश्विक निर्माण हब में तब्दील करने के लिए उद्योगों की औद्योगिक भूमि तक सस्ती और पारदर्शी पहुँच आवश्यक है।

इंडस्ट्री बॉडी ने अपने अध्ययन "सीआईआई भूमि मिशन: भारत में औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार का ढांचा" में औद्योगिक भूमि के पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक चुनौतियों को दूर करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया है।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारों, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के अंतर्गत भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की महत्वाकांक्षाएँ तब तक सफल नहीं हो सकतीं जब तक कि औद्योगिक भूमि पूर्वानुमानित, पारदर्शी और निवेश के लिए तैयार न हो।"

उन्होंने आगे कहा, "सीआईआई भूमि मिशन एक व्यवहारिक ढांचा प्रदान करता है जो सामाजिक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए भूमि मूल्य श्रृंखला में समय की दक्षता, पूर्वानुमान और समन्वय को बढ़ाता है।"

औद्योगिक भूमि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बनी हुई है।

हालांकि, विभिन्न राज्यों में मौजूदा स्थिति जटिल नियामक ढाँचे, अस्पष्ट भूमि स्वामित्व, विलंबित कब्जे और आवंटित भूखंडों के न्यूनतम उपयोग जैसी समस्याओं से ग्रस्त है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चुनौतियाँ पूंजी की लागत को बढ़ाती हैं, परियोजनाओं की शुरुआत में देरी करती हैं और निवेशकों का विश्वास कम करती हैं।

यह रिपोर्ट औद्योगिक भूमि के संपूर्ण जीवनचक्र का मूल्यांकन करती है, जिसमें भूमि की पहचान, आवेदन, आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू), स्वामित्व और उचित जांच-पड़ताल, अधिग्रहण, भौतिक कब्जा, आवंटन के बाद का उपयोग और संस्थागत क्षमता शामिल हैं।

रिपोर्ट की एक प्रमुख सिफारिश राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना है, जो भूमि की उपलब्धता, जोनिंग स्थिति, उपयोगिताओं, पर्यावरणीय बाधाओं, और स्वामित्व की स्पष्टता पर वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा।

ऐसा प्लेटफॉर्म पारदर्शिता को बढ़ाएगा और निवेश निर्णय लेने में मदद करेगा।

साथ ही, इस रिपोर्ट में औद्योगिक भूमि आवेदनों के लिए एक पूर्णतः एकीकृत डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली की भी सिफारिश की गई है।

Point of View

NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए क्या जरूरी है?
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए किफायती और पारदर्शी तरीके से उद्योगों की औद्योगिकी भूमि तक पहुँच आवश्यक है।
सीआईआई की रिपोर्ट में क्या सिफारिश की गई है?
सीआईआई की रिपोर्ट में एकीकृत, जीआईएस-सक्षम राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक की स्थापना की सिफारिश की गई है।
औद्योगिक भूमि का महत्व क्या है?
औद्योगिक भूमि विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और रसद के लिए एक मूलभूत संसाधन है।
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