क्या गोवा नाइटक्लब अग्निकांड के आरोपी लूथरा भाइयों को थाईलैंड से लाया गया दिल्ली?
सारांश
Key Takeaways
- लूथरा भाइयों को थाईलैंड से दिल्ली लाया गया।
- गोवा पुलिस ने उनकी तस्वीरें जारी कीं।
- जांच में 100 से अधिक लोगों को बुलाया गया।
- दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के दावों का खंडन किया गया।
- नाइटक्लब का लाइसेंस समाप्त हो गया था।
नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। नॉर्थ गोवा के एक नाइटक्लब में हुई अग्निकांड के सिलसिले में आरोपित लूथरा भाइयों को थाईलैंड में हिरासत में लिए जाने के बाद मंगलवार को दिल्ली लाया गया। एयरपोर्ट पर आग से प्रभावित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरा चेहरे पर मास्क पहने हुए नजर आए। गोवा पुलिस ने आरोपियों की तस्वीरें जारी कीं।
दिल्ली पहुँचते ही गोवा पुलिस ने दोनों भाइयों को हिरासत में ले लिया। इससे पहले, भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध पर थाईलैंड के अधिकारियों ने लूथरा भाइयों को हिरासत में लिया था।
उन्हें ट्रांजिट रिमांड के लिए दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मामले की जांच के लिए गोवा ले जाया जाएगा।
गोवा के इस हादसे में पुलिस ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज करने का कार्य शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय निकाय से जुड़े व्यक्तियों के बयान भी जांच के दायरे में हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान कई महत्वपूर्ण और ठोस जानकारियाँ सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि घटना की जांच के लिए गठित मजिस्ट्रेट जांच समिति ने संपत्ति के मूल मालिक प्रदीप घड़ी अमोणकर से भी पूछताछ की है।
सूत्रों के मुताबिक, समिति ने इस जांच में शामिल होने के लिए 100 से अधिक लोगों को बुलाया है और अब तक कम से कम 20 व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
11 दिसंबर को दिल्ली की एक अदालत ने लूथरा भाइयों की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
सुनवाई के दौरान, गोवा पुलिस के वकील अभिनव मुखर्जी ने तर्क दिया कि दोनों आरोपियों ने अपने व्यवसाय में न्यूनतम भागीदारी का झूठा दावा किया और कहा कि उनकी विदेश यात्रा पहले से तय थी। पुलिस ने इन दावों का खंडन करने के लिए अदालत के सामने कई दस्तावेज पेश किए, जिनमें सौरभ लूथरा द्वारा दायर एफएसएसएआई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आवेदन और जीएसटी रिकॉर्ड शामिल थे, जिसमें दोनों भाइयों और अजय गुप्ता को व्यवसाय में भागीदार के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि प्रतिष्ठान का पंचायत लाइसेंस समाप्त हो गया था और इसे कभी नवीनीकरण नहीं कराया गया और नाइटक्लब बिना वैध अनुमति के चल रहा था।