बृहस्पति का अद्भुत 'ग्रेट रेड स्पॉट': वैज्ञानिकों की खोज से खुलते हैं नए रहस्य

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बृहस्पति का अद्भुत 'ग्रेट रेड स्पॉट': वैज्ञानिकों की खोज से खुलते हैं नए रहस्य

सारांश

बृहस्पति का ग्रेट रेड स्पॉट न केवल सौर मंडल का सबसे बड़ा तूफान है, बल्कि इसके बारे में वैज्ञानिकों ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी प्राप्त की हैं। यह कैसे काम करता है, जानें इस लेख में।

Key Takeaways

  • ग्रेट रेड स्पॉट बृहस्पति का सबसे बड़ा तूफान है।
  • यह आकार में पृथ्वी से भी बड़ा है।
  • साल 2018 में जूनो ने इसकी अद्भुत तस्वीरें ली थीं।
  • यह धब्बा समय-समय पर सिकुड़ता और फैलता है।
  • यह खोज पृथ्वी के तूफानों को समझने में सहायक होगी।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सूर्य से पांचवे ग्रह बृहस्पति को सौरमंडल का सबसे विशाल ग्रह माना जाता है। इसका कुल द्रव्यमान अन्य सभी ग्रहों के द्रव्यमान से भी दोगुना से अधिक है। लेकिन इन सभी तथ्यों के बीच बृहस्पति पर स्थित विशाल लाल धब्बा या ग्रेट रेड स्पॉट, जिसे जीआरएस के नाम से भी जाना जाता है, एक आश्चर्य का विषय है। यह सौर मंडल का सबसे बड़ा तूफान है।

वैज्ञानिकों के लिए जीआरएस का रहस्य एक पहेली बना हुआ है। यह एक विशाल घूमते हुए तूफान के रूप में जाना जाता है, जो आकार में पृथ्वी से भी बड़ा है और कई सदियों से देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के जूनो और हबल दूरबीन द्वारा प्राप्त जानकारियों ने इस रहस्यमयी धब्बे के बारे में अनेक नई जानकारियाँ प्रस्तुत की हैं।

यह धब्बा एक एंटीसाइक्लोन है, जो बृहस्पति के वायुमंडल में घूमता रहता है। इसका आकार इतना विशाल है कि इसमें पूरी पृथ्वी समा सकती है। खगोलविदों ने इसे कम से कम 150-300 वर्षों से लगातार देखा है। पहले यह बहुत बड़ा था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे सिकुड़ता जा रहा है। नासा के जूनो यान ने 2018 में इसकी बेहतरीन तस्वीरें ली थीं, जिनमें इसके रंगों को बेहतर तरीके से दर्शाया गया था। जूनो ने बताया कि इस तूफान का आधार बेहद गहरा है, कुछ तूफान 100 किलोमीटर तक जाते हैं, जबकि ग्रेट रेड स्पॉट 350 किलोमीटर से भी अधिक गहराई तक पहुँच जाता है।

जूनो एक सौर ऊर्जा से संचालित यान है, जो बृहस्पति के चारों ओर लंबे चक्कर लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बृहस्पति की उत्पत्ति, विकास और सौर मंडल के विशाल ग्रहों के रहस्यों को समझना है। हाल ही में नासा के हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने इस धब्बे के बारे में जानकारी दी, जिसके अनुसार, जीआरएस उतना स्थिर नहीं है जितना कि यह दिखता है। यह जेली के कटोरे की तरह हिलता-डुलता है। हबल की तस्वीरों से वैज्ञानिकों ने एक टाइम-लैप्स फिल्म बनाई, जिसमें यह देखा जा सकता है कि धब्बा हर 90 दिनों में आकार में फैलता और सिकुड़ता है। जब यह धीमा होता है, तो चौड़ा हो जाता है और तेज होने पर संकरा।

नासा के शोधकर्ता एमी साइमन ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, "आउटर प्लैनेट एटमॉसफेयर लीगेसी प्रोग्राम के तहत हमने काम किया, जिसमें पता चला कि इसकी गति में थोड़ा बदलाव आता है, लेकिन आकार का इस तरह बदलना अप्रत्याशित था। हबल की उच्च रिजॉल्यूशन तस्वीरों से पहली बार साफ दिखा कि यह सिकुड़ता-फैलता है। अभी इसका कोई हाइड्रोडायनामिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है।"

वहीं, अल्ट्रावायलेट प्रकाश में देखने पर यह भी पता चला कि जब धब्बा सबसे बड़ा होता है, तो उसका केंद्र सबसे चमकीला होता है, जिससे ऊपरी वायुमंडल में धुंध कम अवशोषित होती है। ये बदलाव रोजाना होते हैं और तूफान के रंग, आकार और गति में सूक्ष्म परिवर्तन दिखाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज पृथ्वी के तूफानों को समझने में सहायक होगी और अन्य तारे के ग्रहों के मौसम के अध्ययन को आसान बनाएगी।

Point of View

बल्कि हमारे ग्रह के तूफानों को समझने में भी मदद करेगी।
NationPress
17/03/2026

Frequently Asked Questions

ग्रेट रेड स्पॉट क्या है?
ग्रेट रेड स्पॉट बृहस्पति पर एक विशाल घूमता हुआ तूफान है, जो पृथ्वी से भी बड़ा है।
बृहस्पति का ग्रेट रेड स्पॉट क्यों सिकुड़ रहा है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रेट रेड स्पॉट का आकार सिकुड़ने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है।
ग्रेट रेड स्पॉट के बारे में नई खोजें क्या हैं?
हाल ही में, वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह धब्बा आकार में सिकुड़ता और फैलता है, जो पहले कभी नहीं देखा गया।
क्या ग्रेट रेड स्पॉट स्थिर है?
नहीं, ग्रेट रेड स्पॉट उतना स्थिर नहीं है जितना दिखता है; यह समय-समय पर आकार बदलता है।
ग्रेट रेड स्पॉट का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
इसका अध्ययन पृथ्वी के तूफानों को समझने में मदद करेगा और अन्य ग्रहों के मौसम का अध्ययन आसान बनाएगा।
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