28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या गुजरात के कच्छ जिले का घेडी गांव जीरा खेती में एक मिसाल बन गया है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या गुजरात के कच्छ जिले का घेडी गांव जीरा खेती में एक मिसाल बन गया है?

सारांश

गुजरात के कच्छ जिले का घेडी गांव जीरा खेती के लिए एक अद्वितीय उदाहरण बन गया है। यहां के किसानों ने अपनी मेहनत और राज्य सरकार के सहयोग से जीरे की खेती को सफलतापूर्वक अपनाया है। जानें कैसे यह गांव आर्थिक समृद्धि की नई राह पर अग्रसर हो रहा है।

मुख्य बातें

जीरा खेती ने किसानों को आर्थिक समृद्धि की नई राह दिखाई है।
राज्य सरकार की सहायता से किसानों को लाभ मिला है।
घेडी गांव का उदाहरण अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा है।

कच्छ, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात के कच्छ जिले के वागड़ क्षेत्र में लहलहाती जीरे की फसल ने इस इलाके को देश-दुनिया में एक नई पहचान दिलाई है। विशेषकर रापर तालुका के घेडी गांव में अधिकांश किसान बड़े पैमाने पर जीरे की खेती कर रहे हैं।

इस रेगिस्तानी क्षेत्र की शुष्क जलवायु और कम वर्षा के कारण पारंपरिक फसलों की खेती चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन कम पानी में तैयार होने वाली जीरे की फसल ने किसानों के लिए नए अवसर खोले हैं।

कच्छ का यह क्षेत्र सीमावर्ती और मरुस्थलीय होने के कारण यहां सिंचाई के साधन सीमित हैं। ऐसे में किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल का चयन किया और जीरे की खेती की ओर रुख किया। राज्य सरकार ने भी इस पहल को प्रोत्साहित किया और बीज, खाद एवं कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देकर किसानों का सहयोग किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में सरकार की इन पहलों का सकारात्मक असर अब जमीन पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

प्रगतिशील किसान महेशभाई मेर ने बताया कि गांव के अधिकांश किसान जीरे की बुवाई करते हैं क्योंकि इसका उत्पादन अच्छा होता है और बाजार में उचित कीमत मिलती है, जिससे मुनाफा भी संतोषजनक होता है।

वहीं, किसान वेलजीभाई मेर का कहना है कि जीरे की खेती से उनका जीवन स्तर बदला है। उन्हें जीरे के बीज पर सब्सिडी मिल रही है और सरकार की ओर से पानी की व्यवस्था भी की गई है, जिससे खेती और बेहतर हो पाई है।

रापर तालुका में बड़े रकबे में जीरे की खेती की जा रही है। कच्छ के रापर तालुका के कृषि अधिकारी भरत कुमार श्रीमाली ने बताया कि किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर सब्सिडी दी जा रही है और अब तक 1,600 किसानों को इसका लाभ मिल चुका है। इससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन में वृद्धि हुई है।

वागड़ क्षेत्र में पैदा होने वाले जीरे की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। सीमावर्ती और रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीरे की सफल पैदावार कर किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। साथ ही सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए मार्केट लिंकेज के जरिए वे अपनी उपज को वैश्विक बाजार तक पहुंचाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। जीरे की खेती ने कच्छ के इस सूखे इलाके को आर्थिक समृद्धि की नई राह पर अग्रसर कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह दर्शाती है कि सही नीतियों और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकते हैं। यह न केवल एक गांव की कहानी है, बल्कि पूरे देश के किसान समुदाय के लिए एक प्रेरणा है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीरा खेती के क्या लाभ हैं?
जीरा खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है और यह कम पानी में भी उगाई जा सकती है।
क्या राज्य सरकार जीरा खेती को प्रोत्साहित कर रही है?
हाँ, राज्य सरकार बीज, खाद, और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी प्रदान कर रही है।
घेडी गांव के किसानों ने जीरा खेती क्यों चुनी?
किसानों ने स्थानीय जलवायु और संसाधनों के अनुसार जीरा खेती करना चुना।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले