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गुजरात: साबरकांठा में 'लालन-पालन' परियोजना से गर्भवतियों का स्वास्थ्य सुधार, मुफ्त पोषण किट का लाभ

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गुजरात: साबरकांठा में 'लालन-पालन' परियोजना से गर्भवतियों का स्वास्थ्य सुधार, मुफ्त पोषण किट का लाभ

सारांश

गुजरात में कुपोषण खत्म करने के लिए 'लालन-पालन' प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जो गर्भवतियों को मुफ्त पोषण किट प्रदान करता है। यह पहल माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद कर रही है।

मुख्य बातें

कुपोषण से निपटने के लिए राज्य सरकार की पहल गर्भवतियों को मुफ्त में पौष्टिक किट माँ और शिशु के स्वास्थ्य में सुधार २,२०० से अधिक महिलाओं को लाभ मिला स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम संचालित

साबरकांठा, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात में कुपोषण को समाप्त करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा विशेष उपाय किए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में, साबरकांठा जिले में राज्य सरकार और जिला पंचायत के सहयोग से 'लालन-पालन' नामक एक अनूठा प्रोजेक्ट आरंभ किया गया है।

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत ४२ किलोग्राम से कम वजन वाली गर्भवतियों को हर २ सप्ताह में घर पर मुफ्त में पौष्टिक आहार किट उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।

साबरकांठा जिला पंचायत और स्वास्थ्य विभाग की सर्वेक्षण में यह पाया गया कि जिन गर्भवती महिलाओं का वजन ४२ किलोग्राम से कम होता है, उनमें आयोडीन, आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है। ऐसी स्थिति में जन्म लेने वाले बच्चों के कुपोषित होने की संभावना अधिक रहती है।

कई मामलों में मातृ मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है। पोषण की कमी के कारण न केवल बच्चे का जन्म के समय वजन कम होता है, बल्कि माँ के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ता है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 'लालन-पालन' प्रोजेक्ट को एक वर्ष पहले शुरू किया था।

इस परियोजना के तहत ४२ किलोग्राम से कम वजन वाली गर्भवती महिलाओं को हर २ सप्ताह में एक संपूर्ण हेल्थ किट प्रदान की जाती है, जिसमें चना, खजूर, प्रोटीन पाउडर, आयरन सिरप और कैल्शियम युक्त पोषक सामग्री शामिल होती है। अब तक जिले में २,२०० से अधिक महिलाओं को यह किट निशुल्क वितरित की जा चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित मॉनिटरिंग और प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को पोषण संबंधी जागरूकता भी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। पहले जिन गर्भवती महिलाओं का वजन ४२ किलोग्राम के आसपास था, उनका वजन अब बढ़कर ५५ किलोग्राम से अधिक हो गया है। साथ ही नवजात शिशुओं के जन्म के समय वजन में भी सुधार देखा गया है।

लाभार्थी मकवाना आरतीबेन ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि उनका गर्भावस्था का सातवां माह चल रहा है और 'लालन-पालन' प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाली किट से उन्हें बहुत फायदा हुआ है। उन्होंने बताया कि पहले उनका वजन कम था, लेकिन नियमित रूप से किट के उपयोग से अब उनका वजन बढ़कर ५५ किलोग्राम हो गया है।

हेल्थ वर्कर परमार हैप्पीबेन ने बताया कि उनके पास ७८ एएनसी (एंटीनाटल केस) पंजीकृत हैं, जिनमें से ६ महिलाएं 'लालन-पालन' प्रोजेक्ट के अंतर्गत आती हैं। ४२ किलोग्राम से कम वजन वाली गर्भवती महिलाओं को किट दी जाती है, जिसमें खजूर, चना, आयरन सिरप और प्रोटीन पाउडर शामिल होता है। इससे महिलाओं का वजन बढ़ा है, हीमोग्लोबिन का स्तर सुधरा है और उनकी तंदुरुस्ती में भी सुधार आया है।

उन्होंने कहा कि साबरकांठा जिले में इस योजना के लागू होने से करीब दो हजार एएनसी को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नवजात शिशुओं के लिए भी एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर रहा है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लालन-पालन प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य कमजोर गर्भवतियों को मुफ्त पोषण किट प्रदान करना और उनके स्वास्थ्य में सुधार लाना है।
इस प्रोजेक्ट के तहत क्या-क्या सामग्री दी जाती है?
प्रोजेक्ट के तहत गर्भवतियों को चना, खजूर, प्रोटीन पाउडर, आयरन सिरप और कैल्शियम युक्त पोषक सामग्री वाली किट दी जाती है।
कितनी गर्भवती महिलाओं को लाभ मिला है?
अब तक इस प्रोजेक्ट के तहत २,२०० से अधिक गर्भवती महिलाओं को लाभ मिला है।
क्या इस प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम मिले हैं?
हाँ, इस प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं, जैसे वजन में वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार।
लालन-पालन प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ?
यह प्रोजेक्ट एक वर्ष पहले शुरू हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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