क्या गुप्त नवरात्रि में रांची से 80 किमी दूर शक्ति का दिव्य मंदिर है?

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क्या गुप्त नवरात्रि में रांची से 80 किमी दूर शक्ति का दिव्य मंदिर है?

सारांश

गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है, जिसमें देवी माता और दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। रांची से 80 किमी दूर स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर में अद्वितीय पूजा विधि है। यह शक्तिपीठ तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है और यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है।

Key Takeaways

  • गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा और दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है।
  • रांची से 80 किमी दूर छिन्नमस्तिका मंदिर स्थित है।
  • यह मंदिर तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं।
  • मंदिर के आस-पास अन्य छोटे मंदिर भी हैं।

रांची, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भगवती की आराधना का पर्व गुप्त नवरात्रि चल रहा है, जिसमें देवी के साथ-साथ दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। आज नवरात्रि का पांचवां दिन है, जो छिन्नमस्तिका माता के दर्शन और पूजन के लिए विशेष माना जाता है। माता का यह दिव्य मंदिर झारखंड में है।

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर दूर रामगढ़ जिले में स्थित रजरप्पा का छिन्नमस्तिका मंदिर विश्व के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। इसे कामाख्या मंदिर के बाद दूसरा सबसे बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है। यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना है और वेदों, पुराणों के साथ ही दुर्गा सप्तशती में भी इसका उल्लेख मिलता है।

छिन्नमस्तिका का मंदिर भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है। यह रामगढ़ से मात्र 28 किलोमीटर दूर है। यहां देवी छिन्नमस्तिका की अद्भुत प्रतिमा है, जिसमें देवी ने अपने कटे सिर को एक हाथ में धारण किया है और उनके गले से तीन धाराएं निकल रही हैं। यह रूप आत्म-बलिदान, परिवर्तन और तंत्र साधना का प्रतीक है।

इस मान्यता के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और पवित्र मन से मां की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह स्थान तंत्र-मंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। भक्त यहां पत्थर पर धागा बांधकर मन्नतें मांगते हैं। मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में महाकाली, सूर्य भगवान, भगवान शिव, और दस महाविद्याओं के अलग-अलग मंदिर भी हैं।

मंदिर की वास्तुकला और कला कामाख्या मंदिर से काफी मेल खाती है। मंदिर के आस-पास छोटे-छोटे मंदिर जैसे अष्टमातृका और दक्षिण काली भी हैं। झारखंड के अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल से भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।

यह मंदिर केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां एक छोटा जलप्रपात भी है, जो सर्दियों में और भी सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है, और लोग परिवार-दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने भी आते हैं। यहां नदी में स्नान करने की परंपरा है। पूर्णिमा और अमावस्या तिथि पर यहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ जुटती है। विवाह और मुंडन संस्कार के लिए भी यह स्थान प्रसिद्ध है। मकर संक्रांति और विजयदशमी पर यहां बड़े मेले आयोजित होते हैं, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। गुप्त नवरात्रि में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। भक्तों का मानना है कि मां छिन्नमस्तिका की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और शक्ति प्राप्त होती है।

यहां पर कई धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस भी उपलब्ध हैं। मंदिर से निकटतम रेलवे स्टेशन रामगढ़ कैंट है, और निकटतम हवाई अड्डा रांची है।

Point of View

बल्कि यह सांस्कृतिक और पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां की अद्भुत वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता हर श्रद्धालु को आकर्षित करती है।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

गुप्त नवरात्रि कब मनाई जाती है?
गुप्त नवरात्रि का पर्व हर साल माता दुर्गा की आराधना के लिए मनाया जाता है, विशेषकर नवरात्रि के पांचवे दिन।
छिन्नमस्तिका मंदिर का महत्व क्या है?
छिन्नमस्तिका मंदिर को शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहां देवी की अद्भुत प्रतिमा और तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है।
क्या यहां साल भर भक्त आते हैं?
जी हां, यहां साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, खासकर पूर्णिमा और अमावस्या पर।
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