क्या बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप में न भाग लेना कमजोरी है?
सारांश
Key Takeaways
- भारत में सुरक्षा की स्थिति मजबूत है।
- राजनीति को खेल से अलग रखना चाहिए।
- इस निर्णय ने बांग्लादेशी प्रशंसकों को दुखी किया है।
- साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखना ज़रूरी है।
- राज्यपाल का विधानसभा से बाहर निकलना एक संवेदनशील मुद्दा है।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में होने वाले आने वाले टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश क्रिकेट टीम का हिस्सा न लेने पर राजनीतिक चर्चाएं गरमा गई हैं। भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने गुरुवार को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
अजय आलोक ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "भारत में आंतरिक सुरक्षा और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा 100 प्रतिशत सुनिश्चित की जाती है। हम ऐसा देश नहीं हैं, जहाँ विदेशी मेहमानों को अपनी जान की चिंता करनी पड़े। इस स्थिति में उनका यह कहना कि वे भारत में सुरक्षित नहीं हैं, यह उनकी कमजोरी को दर्शाता है। उनके अपने देश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं, यह सम्पूर्ण विश्व जान चुका है।"
उन्होंने आगे कहा, "खेल प्रेमियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है। क्रिकेट सिर्फ एक खेल है, और इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए। मुझे विश्वास है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इस निर्णय ने करोड़ों बांग्लादेशियों का दिल तोड़ दिया होगा।"
अजय आलोक ने जम्मू-कश्मीर के डोडा में सेना की गाड़ी के खाई में गिरने से 10 जवानों की शहादत पर भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत दुखद घटना है। हम शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं। जम्मू-कश्मीर और भारत सरकार इस घटना पर ध्यान दे रही है और घायलों को उचित चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।"
भाजपा प्रवक्ता ने सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने पर कहा, "दोनों समुदायों की जिम्मेदारी है कि वे साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखें। यह भारत की सुंदरता है। मुझे उम्मीद है कि दोनों समुदाय के लोग शांतिपूर्ण ढंग से बसंत पंचमी मनाएंगे और जुमे की नमाज भी अदा करेंगे।"
उन्होंने कर्नाटक के राज्यपाल द्वारा बिना स्पीच पढ़े विधानसभा से बाहर निकलने पर कहा, "कर्नाटक या अन्य ऐसे राज्यों में जहाँ विपक्षी सरकार हैं, वहाँ अराजकता की सीमाएं पार हो रही हैं। जिस विधानसभा में राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत का अपमान होता है, वहाँ राज्यपाल किस प्रकार काम कर सकते हैं? ऐसे में उन्होंने समझा कि संविधान के अनुरूप सदन से बाहर निकलना उनके लिए उचित है। इस पर कर्नाटक सरकार को विचार करना चाहिए।"