क्या संसद भवन लोकतंत्र का मंदिर है, वहां ड्रामा नहीं होता? : हरेंद्र मलिक
सारांश
Key Takeaways
- लोकतंत्र की रक्षा के लिए ईमानदारी आवश्यक है।
- संसद भवन को ड्रामा से बचाना चाहिए।
- किसानों की आत्महत्या और बढ़ते विदेशी कर्ज पर चिंता।
- ओलंपिक खिलाड़ियों की सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता।
- सरकार को गरीबों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।
नई दिल्ली, 2 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा है कि भाजपा के सुझावों पर चलने से लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हमारा नेतृत्व बेईमानी को स्वीकार नहीं करता। ईमानदारी से भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती है।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने प्रश्न उठाया कि पीएम मोदी ने चुनावी प्रचार में कहा था कि हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा, क्या ऐसा हुआ? क्या सभी के खाते में 15 लाख आए? क्या चीन ने हमारी ज़मीन पर कब्जा किया, वह क्या छोड़ी?
उन्होंने कहा कि भारत पर विदेशी कर्ज बढ़ गया है, महंगाई बढ़ी है। रोजगार छिना गया है। स्वतंत्रता में कमी आई है। उद्योगीकरण को बंद करके ट्रेडिंग की शुरुआत कर दी गई है। देशभर में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी की सुरक्षा नहीं कर पाए। हम जनता के वकील हैं, हमें सदन में अपनी बात रखने से रोकने के लिए उकसाने वाले बयान दिए जा रहे हैं। संसद भवन लोकतंत्र का मंदिर है। वहां ड्रामा नहीं होता है। हम जनता और मंदिर दोनों के सेवक हैं।
हरेंद्र मलिक ने एसआईआर को लेकर कहा कि हर भारतीय से पूछा जा रहा है कि आप भारतीय हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि जिन्हें आप विदेशी मानते हैं, उनसे प्रूफ मांगिए। यह एक सोची समझी रणनीति है, जिसके माध्यम से वोट काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब को अनाज देकर उन्हें लगता है कि वे देश को खरीद लेंगे। कभी-कभी दस हजार रुपये खाते में भेज देते हैं। ये लोग किसी भी कीमत पर सरकार में बने रहना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि संसद परिसर में ड्रामा करने के लिए बहुत सी जगहें हैं, लेकिन सदन में हंगामे की कोई जगह नहीं है। सदन में ड्रामा नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, विशेषकर विपक्ष से अपील की कि वे सत्र को सुचारू और गरिमामय तरीके से चलाने में सहयोग करें।