हरिवंश को उपसभापति बनाते हुए विपक्ष ने जताई बधाई, लोकसभा उपाध्यक्ष का मुद्दा भी उठाया
सारांश
Key Takeaways
- हरिवंश को उपसभापति बनने पर बधाई दी गई।
- विपक्ष ने चुनाव का बहिष्कार किया।
- लोकसभा उपाध्यक्ष का पद खाली है।
- खड़गे ने लोकतंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता जताई।
- हरिवंश का यह तीसरा कार्यकाल है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर से राज्यसभा के उपसभापति नियुक्त हुए हैं। शुक्रवार को उन्हें इस पद के लिए चुना गया। राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा।
विपक्षी दलों ने हरिवंश के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं रखा। हालाँकि, विपक्ष ने चुनाव का बहिष्कार किया। इस मौके पर विपक्ष ने लोकसभा में उपाध्यक्ष के चुनाव न होने पर भी अपनी नाराजगी दिखाई। निर्विरोध उपसभापति चुने जाने के बाद सभी दलों ने हरिवंश को शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "उपसभापति महोदय, इस प्रतिष्ठित पद पर आपके तीसरे कार्यकाल के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। राज्यसभा में आपके साथ पुन: काम करने का अवसर मिलना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। आपके पुनर्निर्वाचन का यह संकेत है कि आपने अपने पूर्व कार्यकालों में निष्पक्षता और दक्षता से अपने दायित्वों का पालन किया है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है कि आप इस पद पर बैठने वाले पहले मनोनीत सदस्य हैं। यह आपके अनुभव और क्षमता का प्रमाण है।"
खड़गे ने इस अवसर पर एक चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है। इतने वर्षों तक यह पद खाली रहना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। जब हम लोकतंत्र को मजबूत करने की बात करते हैं, तब ऐसी महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था का अनुपालन करना आवश्यक है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद सात वर्षों से रिक्त है। यह अच्छा होता कि राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी उपाध्यक्ष चुना जाता। उन्होंने बताया कि संविधान सदन (पुराने संसद भवन) में उपाध्यक्ष का कक्ष उनके पुराने कक्ष के पास है। जब भी वह वहाँ से गुजरते हैं, तो उन्हें वहां बंद कमरे पर लटका ताला दिखता है। यह उनके लिए एक चिंता का विषय है। खड़गे ने कहा, "हम प्रजातंत्र की बात करते हैं और अगर सात साल से एक डिप्टी स्पीकर को नहीं चुन सके तो इसका क्या अर्थ है।"
खड़गे ने कहा, "उपसभापति से हमारी यह अपेक्षा है कि वह सदन के सभी पक्षों, विशेषकर विपक्ष, को पर्याप्त अवसर और महत्व देंगे। लोकतंत्र की मजबूती के लिए विपक्ष की सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उपसभापति के अनुभव और संतुलित दृष्टिकोण से हमें विश्वास है कि वह इस जिम्मेदारी को भली-भांति निभाएंगे।"
खड़गे ने कहा कि उपसभापति से उन्हें किसी विशेष तवज्जों की अपेक्षा नहीं है, लेकिन यह उम्मीद है कि वह विपक्ष को उचित महत्व देंगे। उन्होंने कहा कि उपसभापति के रूप में हरिवंश जी का यह तीसरा कार्यकाल है और अब उनका अनुभव बढ़ गया है। लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए विपक्ष को जो महत्व मिलना चाहिए, वह आप देंगे, मैं ऐसा अनुरोध करता हूं।