17 अक्टूबर 2026
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यूपी में हेल्थ सप्लीमेंट्स घोटाला: कानपुर और ग्रेटर नोएडा की दो फर्मों के लाइसेंस निलंबन की सिफारिश

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यूपी में हेल्थ सप्लीमेंट्स घोटाला: कानपुर और ग्रेटर नोएडा की दो फर्मों के लाइसेंस निलंबन की सिफारिश

सारांश

उत्तर प्रदेश में हेल्थ सप्लीमेंट्स की दो फर्मों पर बड़ी कार्रवाई — बैच रिकॉर्ड गायब, एनएबीएल जांच के बिना उत्पाद बाज़ार में। एफएसडीए ने कानपुर और ग्रेटर नोएडा की फर्मों के लाइसेंस निलंबन की सिफारिश की और नमूने प्रयोगशाला भेजे।

मुख्य बातें

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने 17 अक्टूबर 2026 को कानपुर और ग्रेटर नोएडा की दो फर्मों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की।
कानपुर की मेसर्स केएसबी लाइफ केयर्स और ग्रेटर नोएडा की मेसर्स उर्मीलाइफ साइंस — दोनों पर गंभीर गैर-अनुपालन पाया गया।
उर्मीलाइफ साइंस ने एनएबीएल -मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बिना उत्पाद री-लेबलर को सौंप दिए।
दोनों इकाइयों में बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड , कच्चे माल के विश्लेषण प्रमाणपत्र और तैयार उत्पादों की जांच रिपोर्ट अनुपस्थित मिलीं।
दोनों फर्मों से नमूने जब्त कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं; रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने 17 अक्टूबर 2026 को कानपुर नगर और ग्रेटर नोएडा स्थित दो हेल्थ सप्लीमेंट निर्माता फर्मों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की है। विभागीय निरीक्षण में दोनों इकाइयों पर बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड, कच्चे माल के विश्लेषण प्रमाणपत्र और तैयार उत्पादों की जांच रिपोर्ट जैसे अनिवार्य दस्तावेज़ अनुपस्थित पाए गए।

मुख्य घटनाक्रम

कानपुर नगर के श्रीनगर, पहाड़पुर बिंगनवा स्थित मेसर्स केएसबी लाइफ केयर्स का निरीक्षण मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय पाण्डेय के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सचल दल ने किया। जांच में गंभीर गैर-अनुपालन उजागर होने पर प्रयोगशाला विश्लेषण हेतु नमूने एकत्र किए गए और सीज़र की कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निलंबन की सिफारिश की गई।

इसी दौरान गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा स्थित साइट-V, कासना औद्योगिक क्षेत्र में मेसर्स उर्मीलाइफ साइंस का भी निरीक्षण किया गया। यहाँ भी एफएसडीए की टीम ने नमूने जब्त किए और लाइसेंस निलंबन की अनुशंसा की।

उर्मीलाइफ साइंस में पाई गई खामियाँ

निरीक्षण दल के अनुसार, मेसर्स उर्मीलाइफ साइंस में न्यूट्रास्यूटिकल्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स का निर्माण बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड के बिना किया जा रहा था। उत्पादों में प्रयुक्त सामग्री के विश्लेषण प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं थे और तैयार उत्पादों की जांच रिपोर्ट तथा बैच रिलीज़ से संबंधित अभिलेख भी निरीक्षण दल को प्रस्तुत नहीं किए गए।

इससे भी गंभीर यह पाया गया कि फर्म ने राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त किए बिना ही तैयार उत्पाद संबंधित री-लेबलर को सौंप दिए थे। एफएसडीए ने इसे गंभीर गैर-अनुपालन की श्रेणी में रखा है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब बाज़ार में हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और बड़ी संख्या में उपभोक्ता इन उत्पादों पर अपने स्वास्थ्य के लिए भरोसा करते हैं। गौरतलब है कि बिना एनएबीएल-प्रमाणित जांच के उत्पाद बाज़ार में पहुँचाना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए सीधा खतरा है। निर्माण, पैकेजिंग और लेबलिंग से जुड़ी अनेक विसंगतियाँ भी दोनों इकाइयों में पाई गईं।

विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य

एफएसडीए के अनुसार, इस कार्रवाई का मकसद हेल्थ सप्लीमेंट्स के निर्माण में निर्धारित मानकों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। दोनों फर्मों से लिए गए नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए गए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

क्या होगा आगे

लाइसेंस निलंबन की संस्तुति के बाद सक्षम अधिकारी अंतिम आदेश जारी करेंगे। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों फर्मों के विरुद्ध अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की भी संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नियमित जाँच अभियान न्यूट्रास्यूटिकल क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने के लिए ज़रूरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उपभोक्ता स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। सवाल यह है कि लाइसेंस निलंबन की 'संस्तुति' और वास्तविक निलंबन के बीच की खाई को पाटने में कितना समय लगेगा — और इस दौरान बाज़ार में पहले से मौजूद उत्पादों का क्या होगा। बिना त्वरित अनुवर्ती कार्रवाई और सार्वजनिक उत्पाद-वापसी तंत्र के, ऐसी कार्रवाइयाँ कागज़ी अनुशासन से आगे नहीं जातीं।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसडीए ने किन दो फर्मों के लाइसेंस निलंबन की सिफारिश की है?
एफएसडीए ने कानपुर नगर स्थित मेसर्स केएसबी लाइफ केयर्स और ग्रेटर नोएडा के कासना औद्योगिक क्षेत्र स्थित मेसर्स उर्मीलाइफ साइंस के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की है। दोनों फर्मों पर हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
उर्मीलाइफ साइंस पर क्या आरोप हैं?
उर्मीलाइफ साइंस पर आरोप है कि उसने बैच मैन्युफैक्चरिंग रिकॉर्ड के बिना उत्पाद बनाए और एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की विश्लेषण रिपोर्ट लिए बिना तैयार उत्पाद री-लेबलर को सौंप दिए। इसके अलावा कच्चे माल के विश्लेषण प्रमाणपत्र और बैच रिलीज़ से जुड़े अभिलेख भी अनुपस्थित पाए गए।
एनएबीएल रिपोर्ट के बिना उत्पाद बेचना क्यों गंभीर उल्लंघन है?
एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की विश्लेषण रिपोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है। इसके बिना उत्पाद बाज़ार में उतारना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए सीधा जोखिम है और खाद्य सुरक्षा कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इस कार्रवाई के बाद आगे क्या होगा?
दोनों फर्मों से लिए गए नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद सक्षम अधिकारी लाइसेंस निलंबन का अंतिम आदेश जारी करेंगे और परिणामों के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
हेल्थ सप्लीमेंट्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की माँग भारत में तेज़ी से बढ़ रही है और लाखों उपभोक्ता इन उत्पादों पर भरोसा करते हैं। बिना उचित गुणवत्ता जांच के बाज़ार में आए उत्पाद स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं; इसलिए एफएसडीए की यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण की दृष्टि से अहम है।
राष्ट्र प्रेस
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