क्या कांग्रेस ने भोजशाला-कमल मौला मस्जिद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया?

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क्या कांग्रेस ने भोजशाला-कमल मौला मस्जिद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया?

सारांश

मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जिसमें भोजशाला-कमल मौला मस्जिद में हिंदू और मुस्लिम दोनों को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई। इस विवादास्पद स्थल पर दोनों समुदायों के एकत्र होने की संभावना है।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देता है।
  • कांग्रेस ने भोजशाला में मुस्लिम और हिंदू दोनों को पूजा की अनुमति दिए जाने का स्वागत किया।
  • धार जिले में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

भोपाल/धार, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में विपक्षी दल कांग्रेस ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें राज्य के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद में मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दी गई है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

पटवारी ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि मध्य प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोनों समुदायों के लोग भोजशाला में धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करने के लिए निर्देश देंगे।

एक अन्य कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने राष्ट्र प्रेस से फोन पर बात करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता है।

मसूद ने कहा कि पहले भी ऐसी ही स्थिति थी जब विवादित स्थल पर हिंदू पूजा-पाठ करते थे और मुसलमान नमाज अदा करते थे। हमारा मानना है कि दोनों पक्षों के लोग वहां जाकर कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे और दूसरे समुदाय की आस्था का सम्मान करेंगे।

मसूद ने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हिंदुस्तान के लिए एक संदेश है कि यह प्रेम का संदेश है। यह जगह नफरत की नहीं है।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस को बताया कि 2016 में जब मैंने इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, तब भी यही फैसला लिया गया था। आज सर्वोच्च न्यायालय ने उसी को आधार मानते हुए कहा है कि एएसआई के आदेश का पालन किया जाना चाहिए, और नमाज और पूजा भी होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विवाद वर्षों से चल रहा है, लेकिन लोग 2003-04 से शांतिपूर्वक उस स्थल पर पूजा और नमाज अदा करते आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।

हिंदू धर्म का वार्षिक त्योहार बसंत पंचमी इस बार शुक्रवार को पड़ रहा है, जो मुसलमानों के साप्ताहिक नमाज का दिन है। दोनों समुदायों के लोग विवादित स्थल पर इकट्ठा होंगे, इसलिए धार जिले में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को नमाज अदा करने की अनुमति दी और मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक स्थल पर नमाज अदा करने की इजाजत दी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान बनाए रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।

Point of View

बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि हम सभी को एक साथ रहना चाहिए।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

भोजशाला-कमल मौला मस्जिद क्या है?
भोजशाला-कमल मौला मस्जिद मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक विवादास्पद धार्मिक स्थल है, जहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा और नमाज अदा करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या महत्व है?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने और दोनों समुदायों को एक साथ लाने का प्रयास है।
क्या इस फैसले से विवाद समाप्त हो जाएगा?
यह निर्णय विवाद को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है, लेकिन वास्तविकता में यह दोनों समुदायों के बीच सहयोग और सम्मान पर निर्भर करेगा।
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