क्या बकायन है आयुर्वेद की चमत्कारी औषधि, जो शरीर को अंदर से साफ करती है?
सारांश
Key Takeaways
- बकायन रक्त और शरीर की सफाई में सहायक है।
- यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है।
- बकायन त्वचा की जलन और सूजन को कम करता है।
- महिलाओं के स्वास्थ्य में भी बकायन का महत्व है।
- इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बकायन (महानिम्ब) एक अद्भुत औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग हमारी पुरानी पीढ़ियों द्वारा किया जाता आ रहा है। यह पेड़, जो आमतौर पर गांवों में पाया जाता है, देखने में साधारण लगता है, पर इसके अंदर अनेक औषधीय गुण छिपे हुए हैं। बकायन का स्वाद भले ही कड़वा हो, लेकिन आयुर्वेद में इसे शरीर को अंदर से साफ करने वाली औषधि के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसके पत्ते, छाल, बीज और फल सभी किसी न किसी रूप में शरीर को बीमारियों से बचाने में सहायक हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, बकायन रक्त को साफ करता है और शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिन व्यक्तियों को बार-बार फोड़े-फुंसी, दाद, खुजली या स्किन एलर्जी जैसी समस्याएँ होती हैं, उनके लिए बकायन बहुत लाभकारी माना जाता है। इसके पत्तों का लेप या रस लगाने से त्वचा की जलन और सूजन में कमी आती है। जब रक्त साफ होता है, तो त्वचा अपने आप स्वस्थ दिखने लगती है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका कृमिनाशक गुण है। पेट में कीड़े, अपच, पेट दर्द या बार-बार दस्त जैसी समस्याओं में बकायन का उपयोग किया जाता है। इसकी छाल और बीज आंतों को साफ करके परजीवियों को नष्ट करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे पाचन तंत्र को मजबूत करने वाली औषधि माना गया है। साथ ही, यह लीवर को डिटॉक्स करने और शरीर की सफाई में सहायक होता है।
बकायन जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में भी लाभकारी है। इसके पत्तों या बीजों का लेप लगाने से दर्द और अकड़न में राहत मिलती है। आयुर्वेद का मानना है कि जब शरीर भीतर से साफ होता है, तो सूजन और दर्द अपने आप कम हो जाते हैं। इसके अलावा, बकायन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में भी मदद करते हैं।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए भी बकायन बेहद उपयोगी है। भारी माहवारी, श्वेत प्रदर और कुछ गर्भाशय संबंधी समस्याओं में इसे अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, बकायन बहुत गुणकारी है, परंतु इसका उपयोग सोच-समझकर करना बहुत आवश्यक है। इसकी अधिक मात्रा हानिकारक हो सकती है। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और गंभीर रोगों से प्रभावित लोग इसका सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह अवश्य लें।